
दुनिया की सबसे बड़ी घंटी
कोटा हैरिटेज चंबल रिवरफ्रंट पर ढाली गई दुनिया की सबसे बड़ी घंटी का सांचा खोलना कोटा विकास प्राधिकरण और संवेदक के लिए जी का जंजाल बन गया है। घंटी ढलाई के बाद इसे खोलते समय हादसे में घंटी बनाने वाले धातु विशेषज्ञ की मौत के बाद इसे खोलने का फॉर्मूला नहीं होने से ढलाई के डेढ़ वर्ष से अधिक का समय गुजरने के बाद भी संवेदक इसे खोलने में सफल नहीं हो पा रहा है।
चंबल रिवरफ्रंट में लगी दुनिया की सबसे बड़ी घंटी के सांचे को खोलते समय हुए हादसे में 19 नवबर 2023 को प्रोजेक्ट डिजाइनर देवेन्द्र आर्य व उनके सहायक की मौत हो चुकी है। इस घंटी को खोलने की तकनीक देवेन्द्र आर्य ही जानते थे। इस घंटी की ढलाई का काम रिवरफ्रंट पर 3 जुलाई 2022 को शुरू हुआ था, जिसकी ढलाई 17 अगस्त 2023 को पूरी कर ली गई। देवेन्द्र आर्य (मेटलॉजिस्ट) धातु के विशेषज्ञ थे। उन्होंने दुनिया की सबसे बड़ी ज्वॉइंटलेस घंटी के लिए विशेष धातु का मिश्रण तैयार किया था।
इसके अलावा घंटी का सांचा बनाने का काम भी उन्होंने किया और इसकी ढलाई भी उनकी देखरेख में हुई। इसे खोलने का काम भी वही कर रहे थे। इसी दौरान हादसे में उनकी और सहायक की मौत हो गई थी।
आयर् ने सांचे में घंटी को आकार देने के लिए विशेष सिलिका रेत मंगवाई थी। इस रेत के साथ केमिकल मिलाया गया। इससे घंटी की ढलाई का सांचा तैयार किया गया, क्योंकि घंटी 79 हजार किलो विशेष धातु से ढाली जानी थी। इससे वहां का तापमान करीब 3000 डिग्री तक पहुंचना था। ऐसे में यह कैमिकल ही सिलिका के साथ मिलकर ऐसा रूप ले सकता था, जिसमें लचक होने के साथ पत्थर जैसी मजबूती हो।
इसे केवल डी-कैमिकललाइज करके ही खोला जा सकता है, जिसका फॉर्मूला आर्य के पास ही था। केडीए के सचिव कुशल कुमार कोठारी ने बताया कि संवेदक की ओर से घंटी को खोलने का काम किया जा रहा है। धातु विशेषज्ञ आर्य की मौत से इसे खोलने का काम रुक गया था। उनके सहायक की मदद से इसे खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं।
Updated on:
26 Jan 2025 08:13 am
Published on:
26 Jan 2025 08:04 am
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