14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बाबा आदम के जमाने के हिसाब से चल रही है ग्राम सेवा सहकारी समितियां

कम्प्यूटरीकरण का इंतजार, व्यवस्थापक भी प्रशिक्षित नहीं, कामकाज में आती है दिक्कत

2 min read
Google source verification
patrika

kuchaman

कुचामनसिटी. ब्लॉक की ग्राम सेवा सहकारी समितियां अभी भी पुराने ढर्रे पर ही चल रही है। समितियों का न कम्प्यूटरीकरण हुआ है और न ही आवश्यक संसाधन मिल पाए हैं। अधिकांश व्यवस्थापक भी कम्प्यूटर के मामले में प्रशिक्षित नहीं है। ऐसे में लेनदेन डिजिटल करने के सरकार के दावे धरातल पर नहीं उतर पा रहे हैं। नतीजन खामियाजा समिति सदस्यों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें अपने गांव के आसपास समिति स्तर पर भुगतान नहीं हो पा रहा और कुचामन सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक आना पड़ता है। इस दौरान उन्हें समय व आर्थिक रूप से अतिरिक्त भार उठाना पड़ता है। जानकारी के अनुसार ब्लॉक में 23 ग्राम सेवा सहकारी समितियां है, लेकिन एक समिति में भी कम्प्यूटरीकरण नहीं हुआ है। यदि ग्राम सेवा सहकारी समिति स्तर पर ही कम्प्यूटरीकरण हो जाए तो सदस्यों को कुचामन नहीं आना पड़े और उन्हें समिति स्तर पर भुगतान हो जाए। पेंशन, महात्मा गांधी नरेगा, भामाशाह योजना के लाभान्वितों को लेनदेन वहीं होने से राहत मिल जाए। उल्लेखनीय है कि कम्प्यूटरीकरण के अभाव में समितियों के रिकॉर्ड संधारण तथा किसानों की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पा रही है।

यूं आती है समस्या
ग्राम सेवा सहकारी समिति सदस्यों को खरीफ व रबी का अलग-अलग ऋण वर्ष में दो निकालना व जमा कराना पड़ता है। इसके लिए उन्हें ऋण की सम्पूर्ण राशि ग्राम सेवा सहकारी समिति में आकर जमा करवानी पड़ती है। बाद में वापस भुगतान के लिए तीन से पांच दिन का इंतजार करना पड़ता है या जल्द भुगतान के लिए कुचामन सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक आना पड़ता है। यदि समिति स्तर पर ही ऋण की राशि का भुगतान हो जाए तो किसानों को कुचामन नहीं आना पड़े। ये समस्या कम्प्यूटरीकरण के बाद ही दूर हो सकती है।

फेल हो रहे दावे
एक ओर किसानों को सहकार रूपे किसान डेबिट कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ ग्राम सेवा सहकारी समितियों में संसाधनों का अभाव है। ऐसे में सरकार के दावे धरातल पर फेल होते दिख रहे हैं। क्योंकि डेबिट कार्ड का उपयोग किसान अपने गांव में नहीं कर सकते। उन्हें इसके लिए कुचामन आना ही पड़ता है। ऐसे में किसानों को राहत नहीं मिल रही है। इधर, सरकार की ओर से घर-घर जाकर डेबिट कार्ड का वितरण किया जा रहा है।

कुचामन ब्लॉक की एक भी ग्राम सेवा सहकारी समिति में अभी कम्प्यूटरीकरण नहीं हुआ है। संभव है जल्द ही सरकार की ओर से इस दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
- बी.एल. चौधरी, पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक, सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक, कुचामनसिटी