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Azadpur Mandi Rates: हरी सब्जियों के दामों में आई भारी गिरावट ने जहां एक तरफ आम उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ किसानों की कमर तोड़ दी है। हैरान करने वाली बात यह है कि थोक मंडी और रिटेल मार्केट के दामों में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिल रहा है। मंडियों में जो सब्जियां पानी के भाव बिक रही हैं, वही महानगरों के फुटकर बाजारों में आते-आते आसमान छू रही हैं। बिचौलियों के इस खेल के कारण किसानों को अपनी फसल कौड़ियों के भाव बेचनी पड़ रही है।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के कप्तानगंज थोक सब्जी मंडी में इन दिनों हरी सब्जियों के रेट बुरी तरह गिर चुके हैं। यहां भिंडी ₹3 किलो, बोड़ा ₹3 किलो और तोरई महज ₹6 किलो के भाव पर बिक रही है। हालात इतने गंभीर है कि घाटे से परेशान किसान मंडियों में फसल बेचने के बजाय उसे जानवरों को खिलाने पर मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि फसल तोड़कर मंडी तक ले जाने का भाड़ा और मजदूरी भी नहीं निकल पा रही है।
छोटे कस्बों में जहां सब्जियां बेहद सस्ती हैं, वहीं दिल्ली-एनसीआर जैसे महानगरों में कहानी बिल्कुल उलट है। दिल्ली की आजादपुर मंडी में शनिवार को जो भिंडी ₹20 किलो बिकी, वह फुटकर बाजारों में ग्राहकों को ₹60 किलो में मिल रही है। इसी तरह थोक में ₹12 से ₹15 किलो बिकने वाली तोरई और करेला फुटकर में ₹40 से ₹60 प्रति किलो तक बेचे जा रहे हैं। थोक और फुटकर के बीच का यह मुनाफा सीधे बिचौलियों की जेब में जा रहा है।
खेतों में हरी सब्जियां भरपूर मात्रा में उग रही हैं, लेकिन किसानों के चेहरे पर मायूसी है। मथौली कस्बे के स्थानीय किसानों के मुताबिक, किराए पर जमीन लेकर दिन-रात मेहनत करने के बाद भी हाथ खाली हैं। अगर एक क्विंटल भिंडी मंडी में बेची जाए तो सिर्फ ₹300 मिलते हैं, जिससे बीज और खाद का खर्च भी पूरा नहीं होता। बेहतर मुनाफे की उम्मीद में किसान अब लोकल मार्केट का रुख कर रहे हैं, लेकिन वहां भी मांग सीमित है।
Updated on:
25 May 2026 05:35 pm
Published on:
25 May 2026 05:21 pm
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