
कुशीनगर अपने बच्चों की मौत पर गमजदा है। हर आंखें नम है। ये नम आंखें कई सवाल भी पूछ रहीं। आखिर इन बच्चों की मौत को दोषी कौन है। कौन होगा जिसको इस हादसे का गुनहगार बताया जाएगा। भले ही जांच रिपोर्ट में ड्राइवर को दोषी बना दिया जाए या किसी अन्य के कंधे पर यह दोषी मढ़ दिया जाए लेकिन क्या यह सच्चाई नहीं कि इस हादसे के लिए पूरा तंत्र जिम्मेदार है। वह तंत्र जो अपने फायदे के लिए नियम-कायदे-कानून को तय करता है।
क्या इस हादसे के लिए शिक्षा विभाग दोेषी नहीं। जिले के बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारी दोेषी नहीं, जिसने बिना मान्यता के ही मानकों को ताक पर रखने वाले विद्यालय को अपने संरक्षण में चलवाया। जबकि ऐसे स्कूलों को सख्ती से बंद करने का आदेश है।
या आरटीओ की जवाबदेही नहीं बनती है। क्योंकि बिना रजिस्ट्रेशन के एक गाड़ी महीनों से सड़क पर चल रही और इस विभाग के साहब लोग न जाने कहां व्यस्त। या वह खाकी वर्दी वाला जो हर चैक-चैराहों पर दो पहिया वाहनों को रोककर डीएल और कागज तो पूछता है लेकिन न जाने किस वजह से सुबह-शाम मासूमों को भेंड-बकरियों को ठूस कर ले जाती गाड़ी नहीं दिखती।
क्या रेलवे अपनी जिम्मेदारी से भाग सकता है। हर साल मानवरहित समपार फाटकों पर हादसे होते रहते हैं लेकिन अरबों की कमाई करने वाले रेलवे के पास इन हादसों को रोकने का कोई उपाय नहीं सूझता।
कुशीनगर में बच्चों के साथ हुए हादसे को अन्य दुर्घटनाओं की तरह कुछ ही दिनों में भूला दिया जाएगा। जांच होगी, मुआवजा बंटेगा और फिर थोड़ी राजनीति के साथ पूरी फाइल डंप। लेकिन क्या हमारे जिम्मेदार, नीति नियंता इस हादसे से सबक लेकर ऐसा कर सकते हैं कि आगे फिर ऐसी गलती नहीं हो।
दरअसल, अगर पूरा तंत्र अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया होता तो शायद दर्जन भर से अधिक मासूमों की जिंदगियां बच जाती। क्योंकि यूपी में न जाने कितने स्कूल अधोमानकों पर साहबानों के रहमों करम पर चल रहे। इन स्कूलों में दिखाने के लिए बस और वैन तो हैं लेकिन वह भी मानकों पर खरे नहीं उतरतेे। लेकिन पूरा तंत्र है कि हादसों के बाद कभी-कभी जागता है और बयानवीरों से प्रेरणा लेकर कुछ दिन तक सक्रिय रहता फिर अपने धंधे में लग जाता।
बहरहाल, बिना मान्यता के चल रहे डिवाइन मिशन स्कूल पर हादसे के बाद ताला लग चुका है। बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही गाड़ी के परखच्चे उड़ चुके हैं। बिना डीएल के गाड़ी चला रहा अप्रशिक्षित चालक नियाज हास्पिटल में हैं। सरकार ने जांच का आदेश दे दिया है। कमिश्नर जांच कर रहे हैं। सरकारी मुआवजों का भी ऐलान हो चुका है। जिम्मेदार विभाग अपना-अपना दामन पाकसाफ करने में जुटे हैं। लेकिन हर कोेई यह बताने में नाकाम साबित हो रहा कि जिनकेे कलेजे के टुकड़ें गए हैं उनको इंसाफ कैसे मिलेेगा।
Published on:
26 Apr 2018 07:15 pm
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