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इस सीट से चुनाव लड़े BJP तो निश्चत मिलेगी जीत

फिलहाल आज की तारीख में हर तरफ से बाला प्रसाद अवस्थी की स्थिति सबसे मजबूत है

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Ruchi Sharma

Sep 10, 2016

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लखीमपुर खीरी. यूं तो आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल जिताऊ प्रत्याशी की तलाश में जुटे है। ऐसे में यह कहना मुश्किल होगा कि धौरहरा विधानसभा पर किस पार्टी का कब्ज़ा होगा। फिलहाल आज की तारीख में हर तरफ से बाला प्रसाद अवस्थी की स्थिति सबसे मजबूत है।

अगर बात करें पिछले विधानसभा चुनावों की तो वर्ष 1991 में बाला प्रसाद को भाजपा ने धौरहरा विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया था। बाला प्रसाद अवस्थी ने जीत हासिल कर अपना व पार्टी का इस सीट पर खाता भी खोला और धौरहरा विधान सभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बनें। इसके बाद राजनीतिक उठा-पकट चलती रही। परिस्थितियों के चलते बाला प्रसाद ने वर्ष 2007 में इसी विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और दिग्गजों को परास्त कर रिकार्ड मतों से जीत भी हासिल की। तब भी बाला प्रसाद ने इस सीट पर बसपा का खाता खोला था।


इसके बाद वर्ष 2012 के विधानसभा के चुनाव में पार्टी सुप्रीमो ने इन्हें मोहम्मदी से चुनाव मैदान में उतरा। यहां भी बाला ने अपना जादू चलाते हुऐ उस स्थिति में रिकार्ड मतों से जीत हासिल की। जबकि पूर्ण बहुमत से समाजवादी पार्टी की सरकार बनी थी। साथ ही मोहम्मदी विधानसभा सीट पर बसपा का खाता भी खोला।फिलहाल दोबारा घर वापसी और भाजपा से चुनाव लड़ने को लेकर अन्य पार्टियों में खलबली मच गई है।

बात अगर धौरहरा विधानसभा की करें तो यहां की आबादी लगभग तीन लाख पंद्रह हजार वोटर हैं। एक अनुमानित आकड़ों के मुताबिक यहां करीब 70 हजार ब्राह्मण, 45 फीसद बैकवर्ड, करीब 15 फीसद मुस्लिम और करीब 15 प्रतिशत ही एससी वोटर हैं। पिछले पच्चीस सालों में हुऐ चुनाव में इस विधानसभा सीट पर दो बार सपा, एक बार कांग्रेस और दो बार बसपा की झोली में रही है।

अगर साल 2012 के चुनाव की बात करें तो उस समय मोहम्मदी में बसपा हासिये पर थी। मानो जैसे बाला ने इस सीट पर जान डाल दी हो।बाला प्रसाद अवस्थी की भाजपा के साथ घर वापसी पर जहां उनके समर्थोको में खुशी है, वहीं अन्य पार्टियों के प्रभारियों को अभी से चिंता सताने लगी है।