
पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष मिश्रा | फोटो सोर्स-ANI
Ashish Mishra: लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में गवाहों को कथित तौर पर धमकाने के आरोपों से जुड़े प्रकरण में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच में आशीष मिश्रा और उनके पिता, पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की कोई भूमिका सामने नहीं आई है।
मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। पीठ आशीष मिश्रा की जमानत से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आशीष मिश्रा फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर रिहा हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यूपी पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट को रिकॉर्ड की। रिपोर्ट में कहा गया है कि गवाह को धमकाने और डराने के आरोपों से जुड़ी एफआईआर की जांच पूरी हो चुकी है और आशीष मिश्रा के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में अमनदीप सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जिस पर सक्षम अदालत संज्ञान भी ले चुकी है। रिपोर्ट में आशीष मिश्रा की किसी भी भूमिका से इनकार किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को पुलिस की प्रगति रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इस दौरान आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि जब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई मामला नहीं पाया गया है, तो शिकायतकर्ता को यदि कोई आपत्ति है, तो उसे सुप्रीम कोर्ट के बजाय संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष उठाना चाहिए।
यह पूरा विवाद अक्टूबर 2021 में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के एक समूह को आशीष मिश्रा के काफिले की गाड़ियों ने कुचल दिया था। इस दर्दनाक हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद देश भर में जमकर हंगामा हुआ था। इसी मुख्य केस से जुड़े गवाहों को धमकाने का एक अलग मामला दर्ज हुआ था, जिसमें अब आशीष मिश्रा का नाम चार्जशीट में नहीं आया है।
Updated on:
16 Jul 2026 01:59 pm
Published on:
16 Jul 2026 12:50 pm
