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बाघों की बढ़ती आबादी से लोग परेशान, 3 साल में 20 लोग बने शिकार

दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बढ़ रही बाघों की आबादी के बीच सल्तनत कायम करने के लिए संघर्ष लगातार जारी है
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लखीमपुर खेरी

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Mahendra Pratap Singh

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Updated: 11 Aug 2018, 4:11 PM IST

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बाघों की बढ़ती आबादी से लोग परेशान, 3 साल में 20 लोग बने शिकार

लखीमपुर खीरी. दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बढ़ रही बाघों की आबादी के बीच सल्तनत कायम करने के लिए संघर्ष लगातार जारी है। युवा बाघ बूढ़े बाबू को जंगल से खदेड़ रहे हैं। बूढ़े बाघ अपने इलाके गांव गवा चुके। उम्रदराज बाघ जंगल से बाहर गन्ने के खेतों को अपना ठिकाना बना रहे हैं। इससे मानव और बाघ के बीच होंने वाली घटनाएं लगातार बढ़ रही है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन के मैलानी रेंज के अलावा, दक्षिण निघासन उत्तर, पलिया, संपूर्णानगर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर तथा गोला रेंज के सटे इलाके में गन्ने के खेतों को ठिकाना बनाए बाघ किसानों के लिए मुसीबत बनती जा रही है।

शारीरिक रूप से अक्षम बाघ इंसानों के लिए ज्यादा खतरनाक

पिछले 3 वर्षों में बाघ इन इलाकों में करीब 20 लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। जबकि 30 से अधिक लोगों के हमले में घायल हो चुके हैं। इसके अलावा 50 से अधिक पालतू पशु भी इन्हों बाघो का शिकार बन चुके हैं। बूढ़े और शारीरिक रूप से अक्षम बाघ इंसानों के लिए ज्यादा खतरनाक होते हैं क्योंकि यह आसान शिकार तलाशते हैं। इतना ही नही जंगल से बाहर रहना बाघो के लिए भी खतरे से खाली नहीं है। शिकारी ऐसे ही बाघों की घात में रहते हैं।

बाघों की आबादी में बढ़ोतरी

वहीं, टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर रमेश कुमार पांडे भी इसी बात से इत्तेफाक रखते हैं कि बाघों की आबादी में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसी स्थिति में बाघों के बीच अपने क्षेत्र के लिए संघर्ष होना लाजमी है। युवा बाघ बूढ़े लोगों को उनके क्षेत्र से बाहर खदेड़ रहे हैं।

दुधवा टाइगर रिजर्व में करीब सवा सौ बाघ

4 साल पहले बाघों की गणना में उत्तर प्रदेश के अंदर 117 बाघों की तस्वीरें कैमरे में कैद हुई थी। दुधवा टाइगर रिजर्व और डब्लू डब्लू एफ के अधिकारियों का अनुमान है कि अकेले दुधवा टाइगर रिजर्व में ही इस समय करीब 125 बाघ है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व और दक्षिणी वन प्रभाग में भी बाघों की संख्या में पर्याप्त बढ़ोतरी हुई है। सही संख्या हाल में ही बाघो की गणना के परिणाम आने के बाद ही पता चल सकेगी।

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