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लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- ‘दो महीने से एक भी गवाह का बयान क्यों नहीं हुआ?’

Lakhimpur Kheri Violence Case : लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार पर नाराजगी जताते हुए पूछा कि 2 महीने से एक भी गवाह का बयान क्यों नहीं हुआ? ट्रायल की सुस्त रफ्तार पर अदालत ने दिए सख्त निर्देश। जानें कोर्ट में क्या हुआ।

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लखीमपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, PC- Patrika

लखीमपुर-खीरी।लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रहे ट्रायल में पिछले दो महीनों से कोई प्रगति नहीं हुई है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट को 'निराशाजनक' बताते हुए सवाल किया- 'मार्च से अब तक आपने क्या किया?'

अदालत ने जताई नाराजगी

पीठ ने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में गवाहों के बयान दर्ज न होना गंभीर चिंता का विषय है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के जज को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए सभी कानूनी कदम उठाए जाएं। साथ ही मुकदमे को तय समयसीमा के अंदर पूरा करने की कोशिश की जाए और इसकी प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाए।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि एक दिन में सिर्फ तीन-चार गवाह बुलाने के बजाय सात-आठ गवाहों को बुलाया जाना चाहिए, ताकि कुछ गवाह न आने पर भी सुनवाई प्रभावित न हो।

दो अलग-अलग मामलों की स्थिति

पहले मामले में कुल 131 गवाहों में से अब तक केवल 44 के बयान दर्ज हो सके हैं, 15 गवाहों को हटा दिया गया है और 72 गवाह अभी बाकी हैं। दूसरे मामले में 35 गवाहों में से 26 के बयान हो चुके हैं, जबकि 9 बाकी हैं।

आशीष मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने खुद अदालत को बताया कि पिछले दो महीनों में कोई गवाह पेश नहीं किया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से सवाल किया।

गवाहों को धमकाने की FIR पर भी नजर

सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में दर्ज की गई तीसरी FIR का भी जिक्र किया, जिसमें गवाहों को डराने-धमकाने का आरोप है। अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि चार हफ्तों के अंदर इसकी जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल की जाए। किसानों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि ट्रायल की इस रफ्तार को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना ही पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।

क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा?

3 अक्टूबर 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीपुर खीरी जिले के तिकुनिया इलाके में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़प हुई थी। किसान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे। इस दौरान एक थार वाहन से किसानों को कुचल दिया गया, जिसमें चार किसानों की मौत हो गई।

इसके बाद गुस्साए किसानों ने हमले में शामिल वाहन चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस घटना में एक पत्रकार की भी जान चली गई थी। कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने आशीष मिश्रा सहित 13 आरोपियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में आरोप तय किए थे।