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सावन मेला शुरु, बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठी छोटी काशी, दूर-दूर से पहुंचे श्रृद्धालु

- त्रेतायुगीन शिवमंदिर में उमड़ेगा शिवभक्तों का सैलाब, इंतजाम चैकस - सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के बीच रहेगी सख्त सुरक्षा व्यवस्था - अंतिम सोमवार को भूतनाथ पर लगेगा एक दिवसीय सबसे बड़ा मेला
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लखीमपुर खेरी

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Nitin Srivastva

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Updated: 17 Jul 2019, 8:22 AM IST

Sawan Month 2019 Shov Pooja

सावन मेला शुरु, बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठी छोटी काशी, दूर-दूर से पहुंचे श्रृद्धालु

लखीमपुर-खीरी. सावन (Sawan) का महीना भगवान भोले के भक्तों के लिए उल्लास लेकर आ गया। छोटी काशी के नाम से विख्यात पौराणिक नगरी में सावन का मेला शुरु होते ही देश प्रदेश के लाखों श्रद्धालु अवढरदानी के जलाभिषेक को उमड़ेंगे। मेले को देखते हुए प्रशासन, नगर पालिका व पुलिस ने तीर्थयात्रियों की सुविधा के अलावा सुरक्षा इंतजामों को चैकस कर लिया है और भीड़ पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। माह के अंतिम सोमवार को प्राचीन और प्रदेश का सबसे बड़ा एक दिवसीय मेला लगेगा।


पहुंचते हैं दूर-दूर से श्रृद्धालु

गोला नगर आध्यात्मिक व धार्मिक स्थली होने के कारण छोटी काशी के नाम से विख्यात है। जहां का त्रेतायुगीन शिवमंदिर शिवभक्त श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। सावन (Sawan) के महीने में यहां लगने वाले करीब एक महीने के मेले में लाखों तीर्थयात्री व कांवरिए पहुंचते हैं जो बेहद श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिर में गाय के कान के आकार के दुर्लभ शिवलिंग का दुग्धाभिषेक (Dugdhabhishek) व जलाभिषेक (Jalabhishek) करके सुखमय जीवन की मनौतियां मांगते हैं। इस मंदिर की महिमा विष्णुपुराण सहित विभिन्न पुराणों में वर्णित है।


यहां लगता है भूतनाथ (Bhootnath Mela) का मेला

मान्यता है कि यहां का शिवलिंग तब से स्थापित है जब लंकाधिपति रावण भोले भंडारी से मिले। वरदान के बाद उन्हें अपने साथ शिवलिंग रूप में अपने सिर पर धारण करके लंका ले जा रहा था। भगवान ने इससे पूर्व शर्त रखी थी कि यदि कहीं भी शिवलिंग रख दिया जाएगा तो वह वहीं स्थापित हो जाएगा। इस यात्रा में रावण को लघुशंका लगने की लीला भी भगवान ने ही रची थी। जो गोकर्ण क्षेत्र की हरीतिमा के वशीभूत होकर लंका जाना ही नहीं चाहते थे। लघुशंका से निवृत्त होने के लिए रावण द्वारा शिवलिंग एक चरवाहे को सौंपने और उसके भार से विह्वल चरवाहे द्वारा शिवलिंग जमीन पर रखने का प्रसंग भी पुराणों में वर्णित है। क्रोधित रावण द्वारा भाग रहे चरवाहे को मारने के लिए उसका पीछा करने और कुछ देर के लिए शिव को सिर पर धारण करने का पुण्यफल पाने वाले चरवाहे का एक कुंए में गिरकर स्वर्गधाम जाने की कथा भी प्रचलित है और यहां वह स्थल भी है। जहां अब भूतनाथ का मेला लगता है।


शुरू हुआ मेला

यहां लगने वाला पौराणिक मेला आज से शुरु हो गया जिसके लिए शिवमंदिर, तीर्थ सरोवर सहित समूचे मंदिर क्षेत्र को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मेले की दुकानें भी सजी हैं। मेले में तीर्थयात्रियों की सुविधा और हर सोमवार को उमड़ने वाले श्रद्धालुओं के सैलाब की परंपरा को देखते हुए प्रशासन, नगर पालिका व पुलिस द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालु मंदिर में कतारबद्ध होकर ही दर्शन पूजन कर सकेंगे और उन्हें मंदिर के भीतर केवल गंगाजल व पूजन सामग्री लेकर ही जाने की इजाजत दी जाएगी। इसके अलावा मंदिर क्षेत्र में भीड़ पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। शहर की यातायात व्यवस्था भी मेले भर के लिए बदली गई है और भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। तीर्थ यात्रियों के वाहन भी शहर के बाहर ही रोक दिए जाएंगे। नगर पालिका द्वारा पेयजल सुविधा, बिजली आपूर्ति व साफ सफाई के इतजामों के अलावा तीर्थ यात्रियों को निःशुल्क गंगाजल उपलब्ध कराया जाएगा।

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