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ललितपुर में स्वास्थ्य विभाग के दावो की खुली पोल, एंबुलेंस के इंतजार में गई जान, ठेले पर लेकर गए हॉस्पिटल

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ अधिकारियों को सुधारने के लिए लाख जतन कर लें, लेकिन सुधार होता नहीं दिखाई दे रहा. ललितपुर में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही मरीजों की जान पर हमेशा ही भारी बनी रहती है। यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग का तमाम सिस्टम उस समय एक ठेले पर नजर आया, जब एंबुलेंस ना मिलने के अभाव में मरीज को ठेले पर ले जाना पड़ा लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी.

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 Death on Thela in Lalitpur

Death on Thela in Lalitpur

ललितपुर के जिला चिकित्सालय में उस समय देखने को मिला, जब एक वृद्ध मरीज की बिगड़ी तबीयत के कारण उसे अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों ने 108 एंबुलेंस को कॉल करके बुलाया। लेकिन घंटा इंतजार करने के बाद जब एंबुलेंस नहीं पहुंची, तो वह आखिर में एक हाथ ठेले पर लेकर रात्रि में जिला चिकित्सालय पहुंचे। जब तक वह हाथ ठेले पर मरीज को लेकर जिला चिकित्सालय पहुंचते उसकी जान जाती रही। जिला चिकित्सालय में तैनात डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया । हाथ ठेले पर मरीज को जिला चिकित्सालय ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है, तो ही जिम्मेदार इस मामले में कुछ भी कहने से कतराते हुए नजर आ रहे हैं। मामला सदर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत शहरी मोहल्ला घुसियाना का है।


ललितपुर के सदर बिगत देर रात्रि जिला चिकित्सालय में सदर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत शहरी मोहल्ला घुसियाना निवासी कुछ लोग एक हाथ ठेला पर अपने बृद्ध मरीज को लेकर शहर की सड़कों से होते हुए जिला चिकित्सालय पहुंचे। जहां इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद वृद्ध मरीज को मृत घोषित कर दिया । मरीज की मौत होने से उसके परिवार में कोहराम की स्थिति उत्पन्न हो गई । जानकारी करने पर पता चला कि जो मरीज हाथ ठेले पर जिला चिकित्सालय आया था, वह मोहल्ला घुसियाना मोती मन्दिर के पास रहने बाला 85 बर्षीय हरिराम पंडा था।

मृतक के परिजनों द्वारा बताया गया कि उसके पिता की अचानक तबीयत खराब हो गई थी। जिसके बाद उन्होंने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए 108 एंबुलेंस को फोन किया था । फोन पर उसे एंबुलेंस सिर्फ 20 मिनट में उपलब्ध कराने की बात की गई थी । लेकिन अपने ही घर में वह एंबुलेंस का इंतजार करीब 2 घंटे तक करता रहा, लेकिन जब एंबुलेंस आती नहीं दिखी और मरीज की तबीयत और बिगड़ने लगी, तो उन्होंने मोहल्ले से ही एक हाथ ठेला किराए पर लिया और अपने मरीज को हाथ ठेले पर लिटाकर जिला चिकित्सालय ले जाए। लेकिन जब तक वह जिला चिकित्सालय लेकर आते उनके मरीज की मौत हो चुकी थी । जिला चिकित्सालय में तैनात डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया ।

यदि कॉल सेंटर से वह एंबुलेंस घर तक पहुंचाने का समय घंटों में बताते, तो हम अपने मरीज को अपने साधन से अस्पताल तक ले आते और उसका इलाज कराते, शायद उसकी जान बच जाती । हमारे मरीज की मौत का जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग का खराब सिस्टम है।

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