
अद्भुत है यहां के शिवजी की त्रिमूर्ति, मंदिर के पानी को छूने से ही दूर हो जाते हैं सभी रोग, होती है हर मनोकामना भी पूरी
ललितपुर. महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में भगवान शिव के प्रति सच्ची आस्था और प्रार्थना का प्रतीक माना जाता है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भक्त सच्चे मन से मंदिर आकर दर्शन और पूज अर्चना करते हैं। देशभर में शिवजी के हजारों मंदिर हैं जहां भक्त अपनी मनोकामना लिए दर्शन के लिए जाते हैं। उत्तर प्रदेश के ललितपुर में भी ऐसा ही एक मंदिर है। जनपद की तहसील पाली के स्थानीय कस्बे से पांच किलोमीटर दूर विंध्याचल पर्वत श्रंखला की गोद में बसे आध्यात्मिक प्राकृतिक पर्यटन तीर्थ स्थल नीलकंठेश्वर धाम एक ऐसा मंदिर है, जहां हर वर्ष महाशिवरात्रि पर भक्तों की अपार भीड़ रहती है।
ललितपुर में बना यह शिव मंदिर सिर्फ जनपद ही नहीं बल्कि मानचित्र पटल पर भी अंकित है। यह शिव मंदिर आस्था के केंद्र बिंदु के साथ-साथ ऐतिहासिक एवं पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालुओं के अनुसार इस मंदिर की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यहां पर आए श्रद्धालुओं की सच्चे पवित्र ह्रदय से मांगी गई मनोकामनाएं पूर्व होती हैं। ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर बहुत ही चमत्कारिक हैं। मंदिर के नीचे से एक प्राकृतिक जलप्रपात निकलता है, जिससे निकलने वाले पानी में बहुत शक्ति है। जलप्रपात से निकलने वाला पानी अगर भक्त को छू जाए, तो उसे होने वाले शारिरीक कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस जलप्रपात का पानी पीने से यहां क्षेत्रवासियों के साथ-साथ दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की कई शारीरिक बीमारियां अपने आप ठीक हो जाती है।
त्रिमूर्ति प्रतिमा का ऐतिहासिक महत्व
क्षेत्र की बड़ी आस्था का केंद्र बिंदु नीलकंठेश्वर धाम की महिमा निराली है। यह तीर्थ स्थल लगभग 2000 वर्ष पुराना है। मंदिर का अपना ही महत्व है। यह शिव मंदिर चंदेल कालीन है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर में भगवान शिव की त्रिमूर्ति प्रतिमा है जो पूरे भारतवर्ष में कहीं नहीं है। ऐसी मान्यता है कि प्रतिमा का चमत्कार देखकर मुगल शासक औरंगजेब नतमस्तक हो गए थे। मंदिर के बारे में ऐसा वर्णित है कि जब औरंगजेब ने हिंदू आस्था मंदिरों को अपना निशाना बनाया और उन्हें तहस-नहस करने की ठानी थी, तब वह मंदिरों को तोड़ते हुए नीलकंठेश्वर धाम पर आए। यहां चमत्कारिक शिव की प्रतिमा को तोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने तलवार से प्रहार किया और गोली भी चलाई। ऐसा करने पर शिव की प्रतिमा से पहले दूध की धार निकली फिर गंगाजल की धारा निकली। इतना ही नहीं बल्कि ओम नमः शिवाय के साथ साथ शंख झालर घंटों की आवाजें आने लगी। यह चमत्कार देख औरंगजेब नतमस्तक होकर वापस लौट गए।
दूर होते हैं रोग
नीलकंठेश्वर धाम तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। मंदिर का रास्ता जंगल से होकर गुजरता है इसलिए यहां सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन द्वारा पुलिस चौकी बनाई गई है जिसमें तीन पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर के नीचे बने झरने में नहाने से शरीर के चर्म रोग दूर हो जाते हैं। वहीं इस झरने का पानी पीने से शरीर के अंदर की कई बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं। झरने का पानी पीने वालों को कभी पेट की बीमारियों से ग्रसित नहीं होना पड़ता। यहां पूरे भारतवर्ष से हजारों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं और अपने वाहनों में झरने का पानी भरकर ले जाते हैं।
Updated on:
21 Feb 2020 12:18 pm
Published on:
21 Feb 2020 10:51 am
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