
कृमि संक्रमण के चलते बच्चों का शारीरिक व बौद्धिक विकास होता है बाधित
ललितपुर. भारत सरकार के अनुसार उत्तर प्रदेश के 1 से 19 साल के 76 प्रतिशत बच्चे कृमि संक्रमण के शिकार हैं। सरकार ने इसको गंभीरता से लेते हुए प्रदेश में साल में दो बार कृमि मुक्ति कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज कुमार ने इस सम्बन्ध में प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र जारी कर प्रदेश में वर्ष 2018-19 के पहले चरण का कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन 10 अगस्त को करने को कहा। इसके अलावा मॉप-अप दिवस का आयोजन 17 अगस्त को होगा।
यदि आपके बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास ठीक तरह से नहीं हो रहा है, तो आपका बच्चा पेट के कीड़ों की संक्रमण से ग्रस्त हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बच्चों में पेट के कीड़े के संक्रमण को एक विश्वव्यापी जन स्वास्थ्य समस्या माना है। इसके चलते जहाँ एक ओर बच्चों का शारीरिक और बौद्धिक विकास बाधित होता है, तो वहीँ दूसरी ओर उनके पोषण और हीमोग्लोबीन स्तर पर भी प्रभाव पड़ता है।
पेट के कीड़ों की गोली
पत्र के मुताबिक प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के एक से 19 साल तक के सभी बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाने के लिए 10 अगस्त को पेट के कीड़ों की गोली (एल्बेंडाजाल-400 मिलीग्राम) खिलायी जाएगी। इसको एक अभियान के तौर पर लेते हुए कोशिश रहे कि कोई भी बच्चा यह दवा खाने से छूटने न पाए। यदि कुछ बच्चे छूट जाते हैं, तो 17 अगस्त को एक बार पुनः कोशिश करके शत-प्रतिशत बच्चों को दवा खिलाना सुनिश्चित किया जाए। कार्यक्रम का क्रियान्वयन स्वास्थ्य, बेसिक-माध्यमिक शिक्षा और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के समन्वय से किया जाएगा।
इन्हें खिलाई जाएगी गोली
इस कार्यक्रम के संचालन के लिए लक्षित आयु वर्ग के मुताबिक 1-5 साल तक के सभी पंजीकृत बच्चों और छह से 19 साल तक के स्कूल न जाने वाले सभी बालक-बालिकाओं, ईंट भट्ठों पर काम करने वाले श्रमिकों और घुमन्तू लाभार्थियों को आंगनबाड़ी केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से पेट के कीड़े की गोली को खिलाया जाएगा। इसके अलावा छह से 19 साल (कक्षा-एक से 12) तक के सभी छात्र-छात्राओं को सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों, मदरसों, पालिटेकनिक और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के माध्यम से यह दवा खिलायी जाएगी।
दवा की मात्रा
06-19 साल के बच्चों को एल्बेंडाजाल-400 मिलीग्राम की एक गोली चबाकर पानी के साथ अध्यापकों के सामने खिलायी जाएगी। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर एक से दो साल के बच्चों को एल्बेंडाजाल-400 मिलीग्राम की आधी गोली चूरा करके तथा दो से तीन साल के बच्चों को एक गोली चूराकर पानी के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा खिलायी जाएगी। इसके अलावा चार से पांच साल के बच्चे एक गोली चबाकर पानी के साथ लेंगे। दवा आंगनबाड़ी केन्द्रों और स्कूलों में ही खिलायी जाएगी, घर ले जाने के लिए नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही जो बच्चे बीमार हैं अथवा पहले से कोई दवा ले रहे हैं, उन्हें इस अभियान के तहत दवा न खिलायी जाए।
पेट के कीड़े की दवा एल्बेंडाजाल के फायदे
एनीमिया में कमी एवं पोषण स्तर में वृद्धि, बच्चों में शारीरिक वृद्धि और वजन बढ़ना, मानसिक एवं शारीरिक विकास में बढ़ोत्तरी, अन्य बिमारियों से बचने हेतु प्रतिरोधी क्षमता बढ़ना, स्कूल में उपस्थिति बढ़ने में सहायक होना और बच्चों की याददाश्त में वृद्धि और स्कूल में सक्रिय रहना।
Published on:
07 Jul 2018 03:18 pm
