
नई दिल्ली। कर्ज के बोझ तले दबी हुई सरकारी एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया को वित्त वर्ष 2018-19 में 8,400 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। एअर इंडिया पहले ही लंबे समय से पैसों की कमी झेल रही है। इसके साथ ही मोदी सरकार काफी समय से एयरलाइन में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए खरीदार देख रही है। फिलहाल कंपनी के एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि ज्यादा ऑपरेटिंग कॉस्ट और फॉरेन एक्सचेंज लॉस के कारण कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
चालू वित्त वर्ष में फायदे में आ सकती है कंपनी
भारी नुकसान झेल रही कंपनी के अधिकारियों को उम्मीद है कि अगर चालू वित्त वर्ष में ईंधन की कीमतें अब और न बढ़ें और विदेशी मुद्रा में ज्यादा उतार-चढ़ाव न आए तो भारतीय एअरलाइन कंपनी इस साल ही मुनाफे में आ सकती है। फिलहाल एअर इंडिया को इस साल 700 से 800 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग प्रॉफिट हो सकता है।
बालाकोट हमले से प्रॉफिट हुआ प्रभावित
आपको बता दें कि इस समय एअर इंडिया 41 इंटरनेशनल और 72 घरेलू गंतव्यों तक अपनी उड़ानों का संचालन करती है। इसके साथ ही बालाकोट के बाद पाकिस्तान ने 26 फ़रवरी को एयरस्पेस बंद कर दिया था। पाक ने भारत के लिए अपने एयर स्पेस को 140 दिन बाद खोला था। एयरस्पेस बंद करने से पकिस्तान और भारत को करोड़ों का नुकसान हुआ था। इसी वजह से एअर इंडिया को भी पिछले वित्त वर्ष में भारी नुकसान उठाना पड़ा।
कंपनी पर 58 हजार करोड़ का कर्ज
बता दें कि एअर इंडिया पर कुल 58,000 करोड़ रुपये का कर्ज है और इसे चुकाने के लिए एयरलाइंस को सालाना 4,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। भारत की एअरलाइन में सुधार करने और कंपनी को प्रॉफिट में लाने के लिए कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। एक स्पेशल परपज व्हीकल एअर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड की स्थापना की गई है, जिसके द्वारा आने वाले कुछ समय में 22 हजार करोड़ रुपए के बॉन्ड जारी किए जाएंगे। पहला बॉन्ड 16 सितंबर को जारी किया जा सकता है।
Updated on:
16 Sept 2019 11:28 am
Published on:
16 Sept 2019 11:14 am
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