
नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक और कई दूसरे पब्लिक सेक्टर बैंको लगातार धोखाधड़ी के मामले सामने आने के बात अब वित्त मंत्रालय ने कड़ा रुख अपना लिया है। मंगलवार को वित्त मंत्रालय ने ऐसे ही धोखाधड़ी के मामलों का पता लगाने और उन पर कार्रवाई करने के लिए पब्लिक सेक्टर के बैंको को एक विशेष निर्देश दिया है। मंत्रालय ने इन बैंको को कहा है कि, वो 50 करोड़ से अधिक एनपीए वाले खातों की जांच करें और उसकी रिपोर्ट सीबीआई को सौंपे। यदि कोई भी आर्थिक अपराध का उल्लंघन करते हुए पाया गया तो इन मामलों की जांच के लिए डीआरआई और ईडी को भी शामिल किया जाए। मंत्रालय ने किसी भी तरह के परिचालन और तकनीकी जोखिम से निपटने के लिए 15 दिन की समयसीमा भी तय किया है। इसमें
नियमों को उल्लंघन पर ईडी को करें शामिल
वित्त सेवा सचिव ने कहा कि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको के एमडी को बैंको में धोखाधड़ी का पता लगाने और ऐसे मामले को सीबीआई के पास भेजने को निर्देश दिया है। 50 करोड़ से अधिक के एनपीए वाले खातों की जांच की जाए और इनकी रिपोर्ट सीबीआई को सौंपी जाए। इसके साथ ही बैंको को ये भी कहा गया है कि, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), फेमा, या किसी भी आयात और निर्यात से जुड़े उल्लंघन के मामलों को प्रर्वतन निदेशालय को शामिल किया जाए।
पीएनबी घोटाला 12,700 करोड़ के पार
गौरतलब है कि पंजाब नेशनल बैंक में नीरव मोदी और मेहुल चौकसी से संबंधित केस में धोखाधड़ी की कुल रकम बढ़कर 12,700 करोड़ के पार पहुुंच गया है। वहीं इसके साथ ही कई पब्लिक सेक्टर बैंको ने हाल में ही कई बड़े कर्ज न चुकाने के मामले को लेकर जांच एजेंसिंयों के पास पहुंची है। पीएनबी घोटाले के बाद से ही कई और दूसरे पब्लिक सेक्टर में घोटालों के मामले समाने आएं है। जिसमें रोटोमैक समूह और शिंभावल शुगर्स के मामले भी शामिल है। शिंभावली शुगर्स मामले में पंजाब के मौजूदा मुख्श्मंत्रीे। कैप्टन अमरिंदर सिंह के दामाद का भी नाम शामिल है।
Published on:
28 Feb 2018 12:03 pm
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