
इस कंपनी में कर्मचारियों को सोने के लिए मिलती है सैलरी
नर्इ दिल्ली। अच्छी नींद लेना या आराम से सोना किसे अच्छा नहीं लगता। मौजूदा समय में काॅरपोरेट कल्चर में जितना वर्कलोड कर्मचारियों पर डाल दिया गया है उससे उनकी जीवनशैली में नींद कम हो गर्इ है। जिसका असर उनकी सेहत पर भी पड़ रहा है। जिसकी वजह से आॅफिस में उनकी परफाॅर्मेंस खराब हो रही है आैर कंपनी को भी उतना मुनाफा नहीं हो रहा है जितना होना चाहिए। हाल ही जापान में हुए एक सर्वे के दौरान 20 साल से अधिक 92 फीसदी कर्मचारियों ने इस बात को स्वीकार किया है कि वो पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहे हैं। एेसे में कर्इ जापानी कंपनियों ने इसका हल भी निकाला है। एक कंपनी तो सोने के लिए कर्मचारियों को रिवाॅर्ड प्वाइंट भी दे रही है। जिसके बाद उन्हें प्वाइंट्स के अनुसार रुपया भी दिया जाता है। आइए आपको भी इस कंपनी के बारे में बताते हैं।
सोने के लिए कंपनी सालाना देती है 64 हजार येन
जापान की कंपनी क्रेजी इंक के काजूहिको मोरियामा का कहना है कि अगर कंपनी के वर्कर्स को अच्छा आराम मिलता है तो वो बिजनेस के लिए काफी फायदेमंद होता है। काजूहिको मोरियामा तो इस आराम के लिए अपने वर्कर्स को पे भी कर रहे हैं। कंपनी के अनुसार जो भी कर्मचारी रात में हफ्ते में पांच दिन छह घंटे लिए सोता है, तो कंपनी उसके अवाॅर्ड प्वाइंट देती है। जिसको भी यह अवाॅर्ड मिलते हैं कि वह कंपनी के कैफेटरिया में जाकर प्वाइंट्स के बदले साल में 64 हजार येन का खाना खा सकते हैं। रात में आराम के समय को ट्रैक एक एप के जरिए किया जाता है। जिसे मैट्रेस बनाने वाली कंपनी एयरवीव इंक नाम की कंपनी ने बनाया है।
सर्वे में आर्इ चौंकाने वाली रिपोर्ट
हेल्थ प्रोडक्ट बनाने वाली फुजी रयोकी कंपनी ने एक सर्वे किया है जिसमें चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आर्इ है। जिसके तहत 20 साल से अधिक उम्र के 92 फीसदी कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पूरी नींद नहीं मिलती है। मोरियामा का कहना है कि कर्मचारियाें के बेहतर परफाॅर्मेंस के लिए कंपनी को उन्हें एक अच्छा खुशनुमा माहौल देना होगा। मोरियामा का कहना है कि आपको अपने कर्मचारियों के अधिकारों की रक्ष करनी होगी। वर्ना देश कमजोर होगा। उन्होंने क्रेजी इंक के बारे में बताते हुए कहा कि वो कंपनी अपने कर्मचारियों को स्लीप इंसेनटिव से लेकर बेहतर खाना, शारीरिक व्यायाम, सकारात्मक माहौल देने की कोशिश करते हैं। साथ ही कंपनी रेगूलर बेसिस पर छुट्टियों पर जाने का भी मौका देती है।
अमरीका आैर जापान को चुका है नुकसान
रैंड काॅर्प के अध्ययन के अनुसार 2009 में अमरीका में कर्मचारियों की आधी अधूरी नींद की वजह से कुल जीडीपी 2.28 यानी 411 बिलियन डाॅलर का नुकसान हो चुका है। वहीं जापान को भी कुल जीडीपी 2.92 फीसदी यानी 138 बिलियन नुकसान उठाना पड़ा है। जिसके बाद दोनों देशों की आेर से इस पर काम किया गया आैर दफ्तर में ही सोने की व्यवस्था या परंपरा को अपनाया गया।
Updated on:
23 Oct 2018, 10:23 AM IST
Published on:
23 Oct 2018, 10:23 AM IST
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