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जिस कंपनी से मिली थी शर्मिंदगी, रतन टाटा ने उसी कंपनी की खरीद ली थी निर्माण अधिकार

इस देश के एक निम्न परिवार को कार खरीदने का सपना पूरे करने वाले रतन टाटा सिर्फ एेसे ही नहीं देश के महान उद्यमियों में से एक गिने जाते हैं।

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Ratan Tata

नर्इ दिल्ली। क्या आपने कभी इस बात के बारे में सोचा है कि 'आम लोगों ' को 'महान लोगों' से अलग करने में सिर्फ एक शब्द "महान" का फर्क होता है। अगर नहीं सोचा तो चिंता मत किजिए आज आपको हम रतन टाटा से जुड़ी एक ऐसी बात बताने जा रहे है जिसके बाद आप खुद ही इस फर्क को समझ जाएंगे। टाटा ग्रुप आज देश की अग्रणी कंपनियों में से एक है। टाटा ही उन कंपनियों में से एक है जब जमशेद जी टाटा के नेतृत्व में देश के उद्योग जगत में क्रांति आया था। आज टाटा देश के प्राइवेट सेक्टर में न सिर्फ सबसे अधिक रोजगार देने वाली कंपनियों में से एक है बल्कि टाटा अपने कर्मचारियों को लेकर आदर्श और मूल्यों को लेकर भी हरदम सतर्क रहती है। इस कंपनी को इस स्थिति में लाने के लिए रतन टाटा को पूर श्रेय जाना चाहिए।


जब बन्द होने वाला टाटा था पैसेंजर कार का बिजनेस

इस देश के एक निम्न परिवार को कार खरीदने का सपना पूरे करने वाले रतन टाटा ऐसे ही नहीं देश के महान उद्यमियों में से एक माने जाते हैं। 1998 में जब टाटा ने पहली बार पैसेंजर कार सेग्मेंट में टाटा इंडिका को बाजार में उतारा था। उस वक्त टाटा इंडिका को रतन टाटा के नेतृत्व में ही बाजार में उतारा गया था। हालांकि इसके लांच के एक साल में ही ये फ्लॉप हो गया। जिसके बाद टाटा को अपने फैसले को लेकर तमाम आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। कर्इ लोगों ने उन्हें यहां तक सलाह दे दी की उन्हें पैसेंजर कार के बिजनेस को बन्द कर देना चाहिए। वो खुद भी इस बात से सहमत हो गए और फोर्ड को इसे बेचने की तैयारी में जुट गए। फोर्ड भी इसमें अपनी रूचि दिखार्इ।


बिल फोर्ड ने कहा, इसे खरीदकर हम आप पर एहसान करेंगे

इसके लिए अपने कुछ कर्मचारियों के साथ रतन टाटा डेट्रायट में फोर्ड के हेडक्वार्टर पहुंच गए। इस डील के लिए रतन टाटा और फोर्ड के अधिकारीयों के बीच करीब तीन घंटे की बैठक हुई। लेकिन टाटा को फोर्ड के अधिकारियों का व्यवहार पसंद नहीं आया है। इस बैठक में फोर्ड के चेयरमैन बिल फोर्ड ने रतन टाटा से कहा, "आपने पैसेंजर कार से जुड़े व्यवसाय की शुरूआत ही क्यों की जब आप इसके बारे में कुछ जानते ही नहीं। यदि हम आपसे इस व्यवसाय को खरीदते हैं तो हम आप पर एहसान करेंगे।" बिल फोर्ड के इस व्यवहार के बार रतन टाटा ने वापस आने के फैसला किया। वो इस बेइज्जती के बाद बड़े तनाव में थे।

रतन टाटा ने पलटी बाजी, बिल फोर्ड को होना पड़ा शर्मिंदा

अपने शुरूआती विफलताओं के बाद टाटा मोटर्स ने पैसेंजर बिजनसे में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया। जबकि इसी अवधि के दौरान फोर्ड का बिजनेस काफी प्रभावित हुआ। हालत ये थी कि फोर्ड दिवालिया होने के कगार पर आ गर्इ थी। उस वक्त टाटा ने फोर्ड के लग्जरी ब्रांड जैगुआर-लैंड रोवर को खरीदने का प्रस्ताव दिया। इसके लिए बिल फोर्ड अपनी टीम के साथ टाटा के हेडक्वार्टर "बॉम्बे हाउस" पहुंचे। अंत में इस डील को 2.3 बिलियन अमरीकी डॉलर (9,300 करोड़ रुपए) में फाइनल किया गया। दिलचस्प बात ये था की इस डील के लिए होने वाले बैठक में इस बार बिल फोर्ड ने रतन टाटा से कहा कि, आप हमारी इस लग्जरी सेग्मेंट को खरीदकर हमपर एहसान कर रहे हैं। आज जैगुआर-लैंड रोवर अब टाटा ग्रुप की संपत्ति है और मुनाफे के साथ बिजनेस कर रही हैं।

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