
नई दिल्ली। बाजार नियामक सेबी की ओर से शेल कंपनियों पर हाल में की गई कार्रवाई में एक चौंकाने वाला वाक्या सामने आया है। सेबी को जिन 331 लिस्टेड शेल कंपनियों का पता चला है, उनमें से 141 पश्चिम बंगल से रजिस्टर्ड है। इनमें से 37 शेल कंपनियां कोलकाता के 9/12 लाल बाजार, पिन-700001 के पते पर रजिस्टर्ड हैं। यह कोलकाता का सेंट्रल इलाका है और चाय और चश्मे के कारोबार के लिए मशहूर है। लेकिन इन दिनों कोलकाता का यह इलाका शेल कंपनियों के कारण चर्चा में है। वजह जानने के लिए हमने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से पूछा तो पता चला कि यह इलाका शहर के बीचोंबीच होने ओर किराया दूसरे लोकेशन के मुकाबले काफी कम होने से शेल कंपनियां के लिए यह पसंदीदा बन गया है।
क्यों है शेल कंपनियों का पसंदीदा एड्रेस
कोलकाता का यह इलाका कोलकाता में पुलिस मुख्यालय के करीब मर्कंटाइल बिल्डिंग्स के नजदीक है। मर्कंटाइल बिल्डिंग्स का निर्माण 1918 में हुआ था और हावड़ा ब्रिज बनने के समय इसका इस्तेमाल इंगलैंड से आयातित लोहे की बीम रखने के लिए हुआ करता था। पुरानी और दागदार हो चुकी इस इमारत में करीब 470 दफ्तर हैं, जिनमें प्रत्येक का औसत कारपेट एरिया 300 वर्गफुट है। इसलिए कम खर्च में शेल कंपनियों खोलने का यह पसंदीदा स्थान है।
सीए की उपलब्धता
यहां युवा सीए को 3,000-4,000 रुपए महीने पर मिल जाते हैं। इसलिए यह पिन शेल कंपनी खोलने के लिए सबसे अच्छी है।
आपको बता दें कि मोदी सरकार की ओर से कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए शेल कंपनियों को बंद किया जा रहा है। अब तक करीब दो लाख शेल कंपनियों को बंद किया जा चुका है। आने वाले समय मे हजारों ऐसी कंपनियों को बंद करने की तैयारी हो रही है। शेल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन सामान्य कंपनियों की तरह ही होता है, लेकिन ये सिर्फ कागजों पर ही कमाई करती हैं।
कैसे करती हैं शेल कंपनियां काले धन को सफेद
मान लिजिए कि वह रूपए के भाव शेयर बेचता है और 5 लाख रूपए का चेक पाता है। इस तरह 45 लाख का लॉस उठाता है। फिर वह कैश (सर्विस फी घटाकर) खरीदार (जिसने वाई को शेयर बेचे थे) से लेता है। एक्स कम भाव पर खरीदता है, उंचे पर बेचता है और अघोषित नगदी को वैध करता है। वाई ऊंचे पर खरीदता है, कम भाव पर बेचता है, नगदी लेता है और टैक्स बचाने के लिए लॉस बुक करता है।
Published on:
18 Aug 2017 09:08 am
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