
नई दिल्ली। भारत में साइबर खतरे से निपेटने के लिए जल्द ही कारगर रणनीति बनाने की जरूरत है। एसोचैम, अर्नेस्ट एंड यंग और साइबर सिक्योरिटी कंपनी कासपर्सकी लैब की साझा रिपोर्ट में यह बात कही गई है। पिछले कुछ महीनों में सरकारी और प्राइवेट उद्यमों पर साइबर हमले तेजी से बढ़े हैं। इसके चलते संस्थाओं के संचालन और ग्राहकों पर पड़ा है। साइबर हमले विश्व स्तर पर सरकारों और उद्यमों के लिए सबसे खतरनाक चुनौती बन चुके हैं। बड़े पैमाने पर डाटा चोरी, वैश्विक गोपनीयता संकट की धमकी के साथ ब्लैकमेलिंग और प्रतिष्ठा की बड़े पैमाने पर क्षति आज के समय में एक आम बात हो गई है। ऐसे में इस खतरे से मुकाबला करने के लिए अधिक कुशल और भरोसेमंद पैच रणनीति अधिक जरूरी बन गई है। भारत उन देशों में शामिल है जो तकनीक में तेजी से विकास कर रहा है। लेकिन यही तकनीकी विकास इसके यूजर्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक साइबर हमलों को न्योता दे रहा है।
3.25 लाख से ज्यादा कंप्यूटर प्रभावित
इससे पहले हाल ही में साइबर फ्रॉड और साइबर क्राइम को रोकने के लिए गृह मंत्रालय की तरफ से गठित साइबर एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ब्रांच अब साइबर क्राइम को रोकने के लिए बड़े कदम उठाने की तैयारी में है. गृह मंत्रालय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस विंग के जरिए राज्यों से यह कहा जाएगा कि वह अपने-अपने राज्यों की राजधानी और महत्वपूर्ण स्थानों पर साइबर क्राइम और बैंक फ्रॉड की जांच को बेहतर करने के लिए 'फॉरेंसिक लैब' बनाएं। आपको बता दें कि पूरे विश्व स्तर पर साइबर हमले से करीब सवा तीन लाख से ज्यादा कंप्यूटर इस साल प्रभावित हुए हैं। जैसे-जैसे लोगों की दिनचर्या और उनके काम बदल रहे हैं वैसे-वैसे इस तरीके के फ्रॉड भी बढ़ते जा रहे हैं। लोगों के हाथों में स्मार्टफोन है, कंप्यूटर हैं, लैपटॉप हैं जिस पर वह अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल हर बात शेयर करने में लगे हैं जिसका फायदा हैकिंग करने वाले लोग उठा रहे हैं।
Published on:
30 Nov 2017 03:55 pm
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