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कभी 32 बार हुआ था नौकरी से रिजेक्ट, अब ऐसे बना 23 लाख करोड़ का मालिक हैं

हम आपको सफलता की एक ऐसी ही कहानी के बारे में बता रहें हैं। ये सफलता की कहानी है अलीबाबा ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन "जैक मा" की। जैक मा फिलहाल चीन के सबसे दौलतमंद इंसान है। जैक मा की मौजूदा संपत्ति करीब 23 लाख करोड़ हैं। 

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Manish Ranjan

Jul 25, 2017

Jack Ma

Jack Ma

नई दिल्ली। हम सब अपनी जिन्दगी में कुछ कर गुजरने की चाहत रखते हैं। लेकिन सफल वो ही होते हैं जो असफलताओं से निराश नहीं बल्कि और लगन से मेेहनत करते हैं। इतिहास के पन्नों में हम जो भी कहानियां पढ़ते हैं उन सब में एक बात निरंतर देखने को मिलती हैं। वो है हार न मानने की। आज हम आपको सफलता की एक ऐसी ही कहानी के बारे में बता रहें हैं। ये सफलता की कहानी है अलीबाबा ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन "जैक मा" की। जैक मा फिलहाल चीन के सबसे दौलतमंद इंसान है। जैक मा की मौजूदा संपत्ति करीब 23 लाख करोड़ हैं।



पैसे के आभाव में बीता बचपन
अलीबाबा के जैक मा के अमीर बनने की कहानी काफी दिलचस्प हैं। जैक मा चीन में एक गरीब परिवार में पैदा हुए थे। दो बार कॉलेज के एंट्रेेंस एग्जाम मे फेल हुए फिर केएफसी सहीत करीब 32 कंपनियों में नौकरी के लिए रिजेक्ट होते रहे। फिर उन्हें अपने तीसरे इंटरनेट कंपनी अलीबाबा से अभूतपर्व सफलता हासिल हुई। जैक मा का जन्म 15 अक्टूबर 1964 को दक्षिणी चीन के हंगझोउ मे हुआ था। अपने तीन भाई बहन में जैक मा दूसरे थे। जैक मा अपने भाई बहनों के साथ उस दौर में बड़े हुए थे जब कम्यूनिस्ट चीन पश्चिम से बिल्कुल अलग-थलग हो रहा था। उनके युवा होने के दौर में उनके परिवार के पास ज्यादा पैसे नहीं थे।


बचपन मे कीड़ों के साथ खेलना पसंद था
जैक मा बचपन से ही तेज थे और छोटी सी बात पर भी अपने सहपाठियों से लड़ाई कर बैठते थे। जैक मा 'अलीबाबा' नामक एक किताबा में अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए कहते है कि मैं उनसे खुद से बड़े लोगों से कभी डरता नहीं था। जैक बचपन में बाकी बच्चो जैसे ही थे और उन्हे बचपन में क्रीकेट नामक कीड़े को पकड़ कर उन्हे लड़ाना बहुत पसंद था। उन्हे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की कीड़ कितना बड़ा था, उन्हे तो बस उन कीड़ों को पकड़ कर आपस में लड़ाना पसंद था।




फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार
1972 में अमेरीकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन के हंगझोउ के दौरे के बाद उनका होमटाउन एक टूरिस्ट प्लेस बन गया। जैक मा जब अपने टीनएज के दौर में थे तो रोज सुबह पर्यटकों को अंग्रजी में गाइड करने के लिए शहर के बड़े होटलों मे पहुुच जाते थे। उनका निकनेम "जैक" उनके एक टूरिस्ट फ्रेंड ने दिया था। हाईस्कूल पूरा होने के बाद जैक मा ने आगे की पढ़ाई करने के लिए कॉलेजों में अप्लाई किया। पर वे दो बार एंट्रेंस परीक्षा में फेल हो गए। हार न मानने वाले जैक मा ने जम के पढ़ाई की और तीसरी बार वे हंगझोई टीचर्स इंस्टीट्यूट में दाखिला पाने में सफल रहें। 1988 में ग्रैजुएट होने के बाद कई सारे कंपनियों में दाखिले के लिए अप्लाई किया।


सर्च रिजल्ट में चीनी बीयर के नाम न मिलने पर इंटरनेट कंपनी खोला
इंग्लिश टीचर की नौकरी पाने से पहले वो केएफसी सहित कई दर्जनों कंपनियों से रिजेक्ट भी हुए। टीचर की नौकरी के लिए उनको महज 12 डॉलर प्रतिमाह मिलता था। जैक को कम्प्यूटर और इंटरनेट के बारे में कोई जानकरी नहीं था पर 1995 मे अमेरीका में एक दौरे पर वो इससे बड़े प्रभावित हुए। जैक मा ने पहला बार इंटरनेट पर 'बीयर' सर्च किया लेकिन उन्हें सर्च रिजल्ट में कोई भी चीनी बीयर का नाम नहीं दिखा। इसके बाद ही चीन के लिए एक इंटरनेट कंपनी खोलने का फैसला लिया। हालांकि उनके शुरूआती दो वेंचर बुरी तरह से फेल हो गए। लेकिन इसके 17 साल बाद वो अपने कुछ दोस्तों को एक ऑनलाइन मार्केट प्लेस "अलीबाबा" में इंवेस्ट करने के लिए मनाने में सफल रहें। वर्ष 2005 में याहू ने उनकी कंपनी में 40 फीसदी शेयर खरीदने के लिए करीब 1 अरब डॉलर खर्च किया।

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