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जानिए क्यों बिकने जा रही आदित्य बिड़ला ग्रुप की ये प्रमुख कंपनी

सूत्रों के अनुसार इस डील को पूरा करने के लिए 'मोर' का ड्यू डिजिलेंस पूरा कर लिया गया है।

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kumar mangalam Birla

जानिए क्यों बिकने जा रही आदित्य बिड़ला ग्रुप की ये प्रमुख कंपनी

नई दिल्ली। नोटबंदी और जीएसटी के बाद देश में कंपनियों के बिकने या बंद होने की बहार सी आ गई है। देश की बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिकार्ट और विशाल मेगा मार्ट के बाद अब आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी आदित्य बिड़ला रिटेल (एबीआरएल) की सुपरमार्केट चेन 'मोर' बिकने को तैयार है। ईटी के अनुसार 'मोर' को खरीदने के लिए समारा कैपिटल और एबीआरएल के बीच अंतिम दौर की बातचीत चल रही है। बताया जा रहा है कि समारा कैपिटल 'मोर' को 2500 करोड़ रुपए में खरीदने को तैयार है। सूत्रों के अनुसार इस डील को पूरा करने के लिए 'मोर' का ड्यू डिजिलेंस पूरा कर लिया गया है। ईटी के अनुसार बीते वित्त वर्ष के समापन पर 'मोर' के पास देशभर में कुल 493 सुपरमार्केट्स और 20 हाइपरमार्केट थे। कंपनी के पास कुल 20 लाख वर्ग फुट का रिटेल स्पेस था।

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बड़े कर्ज में फंसी है कंपनी

जानकारी के अनुसार 'मोर' सुपरमार्केट की ऑपरेटिंग कंपनी आदित्य बिड़ला रिटेल 2017 में भारी कर्जे में थी। 2017 में एबीआरएल को 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी के साथ 4194 करोड़ रुपए की आमदनी हुई थी। इस वित्त वर्ष में कंपनी को 644 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। कंपनी पर 6573 करोड़ रुपए का कर्ज था जिसके लिए कंपनी को 471 करोड़ रुपए का ब्याज देना पड़ा था। बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि 10 साल पहले त्रिनेत्र-फैबमॉल और दो साल पहले जुबिलेंट की टोटल सुपर स्टोर के अधिग्रहण की वजह से एबीआरएल का कर्ज बढ़ा है।

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कंपनी का कैश फ्लो बढ़ाने के प्रयास में जुटे कुमार मंगलम बिड़ला

जानकारी के अनुसार आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगला बिड़ला एबीआरएल को लेकर एक महीने पहले ही सक्रिय हो गए थे। तब उन्होंने और उनके परिवार ने 2800 करोड़ रुपए के फूड और ग्रॉसरी बिजनेस से जुड़े बॉन्ड को शेयर में बदल दिया था। इससे कंपनी का कर्ज घट गया था। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कुमार मंगला बिड़ला कंपनी का कर्ज कम कर कैश फ्लो बढ़ाना चाहते हैं ताकि निवेशक कंपनी में दिलचस्पी दिखाएं। बीते कुछ सालों में कंपनी ने घाटे वाले स्टोर्स को भी बंद किया है।