
fan wind
पंखे-कूलर से निकलने वाली हवा का उपयोग कर आप राहत की सांस लेते होंगे, लेकिन क्या आपको लगता है कि इस हवा का भी कोई इस्तेमाल हो सकता है? शहर के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने इस सवाल का आसान-सा, लेकिन रोचक जवाब दिया है। स्टूडेंट्स ने इस हवा का उपयोग कर बिजली बनाकर दिखाई है। दरअसल, पंखे-कूलर से निकलने वाली ज्यादातर हवा इंसान के उपयोग के बाद वेस्ट हो जाती है।
हालांकि यह पूरे कमरे में घूमती है, लेकिन यदि इसके कुछ हिस्से का इस्तेमाल कर लिया जाए, तो यह काफी मात्रा में बिजली पैदा कर सकती है। हवा को विंड एनर्जी के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे लंबे समय तक के लिए बिजली का उत्पादन हो सकता है। स्टूडेंट्स का यह आइडिया ऑफिसों और घरों में घंटों तक चलने वाले पंखों से बिजली बनाने में कारगर साबित हो सकता है। वीआईटी में आयोजित प्रोजेक्ट एग्जीबिशन में स्टूडेंट्स ने रिन्युएबल एनर्जी के अल्टीमेट आइडिया प्रजेंट किए और लाइव डेमोंस्ट्रेशन करके दिखाया।
होगा मोबाइल चार्ज
स्टूडेंट मधुर गोदारा, मुकेश कुमार, रवीश कुमार और विनोद चौधरी के अनुसार, यदि पंखे के नीचे छोटे विंग्स वाला पंखा लिटाकर रख दिया जाएे ताकि यह पंखे से आने वाली सीधी हवा को एब्जॉर्ब कर स्पीड पकड़ सके। साथ ही इसके पीछे डायोड लगाकर इसे रिचार्जेबल बैटरी या जनरेटर से जोड़ दिया जाए, तो यह एक घंटे में इतनी बिजली बना सकता है कि इससे पूरा मोबाइल चार्ज किया जा सकता है।
नीचे रखे जाने वाले पंखे का वेट हल्का होना चाहिए ताकि यह ऊपर से आने वाली हवा के फैलाव के बावजूद स्पीड से चल सके। वहीं कूलर की हवा के लिए इसे सामने रखा जा सकता है।
एक रूम में लगभग 600 राउंड पर मिनट (आरपीएम) की गति से एक पंखा घूमता है। जबकि नीचे रखे जाने वाले पंखे की गति 120-140 आरपीएम होती है। प्रो. वाई.के. विजय के अनुसार, यह एनर्जी प्रोडक्शन जनरेटर की ताकत और बैटरी की कैपिसिटी पर निर्भर करेगा।
यदि आधा घंटे में एक एम्पीयर बिजली जनरेट करता है तो यह एक घंटे में पूरे मोबाइल को चार्ज कर देगा। स्टूडेंट्स सोलर और विंड के कॉम्बिनेशन से हाइब्रिड एनर्जी बनाने पर भी रिसर्च कर रहे हैं। प्रो. विजय के अनुसार, ऑफिसों और घरों में घंटों पंखे चलते हैं, यदि इनकी हवा का इस्तेमाल किया जाए, तो यह रिन्युएबल एनर्जी की दिशा में अहम कदम होगा।
झूले से बनेगी बिजली
स्टूडेंट अभिषेक, प्रसून, शेर मोहम्मद और रजत ने झूले से बिजली बनाने का कारनामा किया है। स्टूडेंट्स के अनुसार, यदि एक झूले से यूनीडायरेक्शनल बियरिंग से फ्लाय व्हील और डायनेमो अटैच कर दिए जाएं, तो यह जब-जब रोटेट होगा तब-तब इससे मैकेनिकल एनर्जी जनरेट होगी। यानी जब झूले पर कोई झूल रहा होगा तो यह बिजली पैदा कर रहा होगा। इससे प्रोड्यूस होने वाली एक घंटे में एनर्जी लगभग 14 मिनट तक एलईडी लाइट्स को जला सकती है। जो किसी पार्क या गार्डन के लिए कारगर साबित हो सकती है।
Published on:
01 May 2016 02:32 pm
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