
Animals That Survive Without Water| image credit gemini
Animals That Survive Without Water: पानी हमारे लिए बहुत जरूरी है, खासकर गर्मियों में तो इसके बिना रहना मुश्किल होता है। पानी न केवल प्यास बुझाता है, बल्कि हमारी किडनी को साफ रखने और बॉडी को हेल्दी रखने में भी बड़ा रोल निभाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में कुछ ऐसे जानवर भी हैं, जो अपनी पूरी लाइफ पानी की एक बूंद पिए बिना गुजार देते हैं? जी हां, सुनने में ये थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन कुदरत के इन अजूबों ने खुद को ऐसे ढाल लिया है कि इन्हें प्यास ही नहीं लगती। आज के इस लेख में आइए जानते हैं ऐसे ही 6 जानवरों के बारे में कि वे कैसे बिना पानी के जिंदा रहते हैं।
नॉर्थ अमेरिका के रेगिस्तानों में रहने वाला छोटा सा कंगारू रैट कभी पानी नहीं पीता। यह सिर्फ सूखे बीज खाकर जिंदा रहता है। इसके शरीर का सिस्टम इतना कमाल का है कि बीज पचाते समय जो केमिकल रिएक्शन होता है, उसी से यह अपनी बॉडी के लिए पानी बना लेता है। इसकी किडनी इतनी पावरफुल होती है कि इसका पेशाब सिरप से भी ज्यादा गाढ़ा होता है और पॉटी एकदम सूखी। दिन भर यह ठंडी बिलों में दुबका रहता है ताकि पसीना न निकले और शरीर की नमी बची रहे।
ऑस्ट्रेलिया का पायाा जाने वाला यह प्यारा सा जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए पूरी तरह यूकेलिप्टस यानी नीलगिरी की पत्तियों पर टिका होता है। कोआला दिन भर में करीब 1 किलो पत्तियां खा जाता है, जिनमें काफी नमी होती है। हालांकि, आजकल बढ़ती गर्मी और जंगलों की आग की वजह से कभी-कभी इन्हें पेड़ों से बहता पानी चाटते देखा गया है, लेकिन नॉर्मल दिनों में इन्हें अलग से पानी की जरूरत नहीं पड़ती।
ऑस्ट्रेलिया की यह छिपकली अपने मुंह से पानी नहीं पी सकती क्योंकि इसका मुंह सिर्फ चींटियां खाने के लिए बना है। इसकी स्किन पर छोटी-छोटी बारीक नालियां होती हैं। जब रात में इसकी बॉडी पर ओस गिरती है या यह गीली रेत पर बैठती है, तो इसकी स्किन उस नमी को सोख लेती है और वह पानी सीधे इसके मुंह तक पहुंच जाता है। यानी यह अपनी त्वचा से पानी पीती है।
रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाली ये चींटियां बीजों के अंदर मौजूद वसा यानी फैट को तोड़कर उससे पानी निकाल लेती हैं। इसके अलावा, ये अपने बिलों के अंदर की नमी का फायदा उठाती हैं। बहुत ज्यादा गर्मी होने पर ये बाहर निकलना बंद कर देती हैं ताकि शरीर का पानी भाप बनकर न उड़े। अगर कहीं ओस की बूंद दिख जाए, तो ये उसे छोड़ती भी नहीं हैं।
सहारा के रेगिस्तान में रहने वाली इन लोमड़ियों को शायद ही कभी पानी पीने की जरूरत पड़ती है। ये अपने शिकार और रेगिस्तानी पौधों को खाकर अपनी नमी की कमी पूरी कर लेती हैं। इनके बड़े-बड़े कान सिर्फ सुनने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये शरीर की गर्मी को बाहर निकालने और पानी बचाने में भी मदद करते हैं। रात के समय ये अपनी गुफाओं की दीवारों पर जमी ओस को चाटकर काम चला लेती हैं।
चूहे जैसा दिखने वाला छोटा सा जीव जरबोआ रेगिस्तान का माहिर खिलाड़ी है। यह अपनी पूरी लाइफ की पानी की जरूरत पौधों की जड़ों, बीजों और कीड़े-मकौड़ों से पूरी करता है। इसका शरीर पानी बचाने में इतना माहिर है कि इसका पेशाब बहुत गाढ़ा होता है। रात में बाहर निकलने और बड़े कानों की वजह से यह खुद को ठंडा रख पाता है और पानी की बर्बादी रोकता है।
Updated on:
16 Mar 2026 10:12 am
Published on:
16 Mar 2026 10:08 am
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