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जिम गए बिना कैसे घटाएं वजन! बिना हिले-डुले की जाने वाली आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज का कमाल

Isometric Exercise: आज के इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि ये आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज क्या होती है, इसे कैसे किया जाता है और इसके क्या फायदे हैं।

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Isometric Exercise

Isometric Exercise| image credit gemini

Isometric Exercise: आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में जिम के लिए घंटों निकालना हर किसी के बस की बात नहीं है। इसलिए ज्यादातर लोग फिट रहने के लिए जिम जाने से परहेज करते हैं क्योंकि ज्यादातर लोग फिटनेस का मतलब ट्रेडमिल पर दौड़ना या भारी वजन उठाना ही समझते हैं। लेकिन एक नई रिसर्च से पता चला है कि आप बिना हिले-डुले, बस एक ही पोज में रुककर भी अपनी सेहत बना सकते हैं। इसे आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज (Isometric Exercises) कहते हैं। आइए आज के इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि ये आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज क्या होती है, इसे कैसे किया जाता है और इसके क्या फायदे हैं।

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज से जुड़े हुए कई खुलासे (Scientific Evidence)


आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के ऊपर साइंटिस्ट्स ने 1990 से लेकर 2023 तक की कई रिसर्च का बारीकी से अध्ययन किया है। लगभग 16,000 लोगों पर किए गए इस टेस्ट में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। पता चला कि दीवार के सहारे टिक कर बैठना (Wall Squat), हैंडग्रिप (बॉल को दबाना) या पैरों को सीधा रखकर बैठना, हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट (HIIT) और कार्डियो से भी ज्यादा असरदार है। जहां नॉर्मल एक्सरसाइज से ब्लड प्रेशर 4.49/2.53 mmHg तक कम होता है, वहीं आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज इसे 8.24/4.00 mmHg तक कम कर सकती है, जो कि बीपी की दवाइयों के असर के लगभग बराबर है।

यह कैसे काम करती है? (How It Works)


जब आप किसी एक पोज में अपनी मांसपेशियों (Muscles) को सिकोड़कर होल्ड करते हैं, तो उस हिस्से की खून की नसों पर दबाव पड़ता है। इससे वहां ऑक्सीजन की कमी होती है और वेस्ट प्रोडक्ट्स जमा होते हैं। जैसे ही आप उस पोज को छोड़ते हैं, खून का बहाव एकदम तेजी से वापस आता है। बार-बार ऐसा होने से नसों का लचीलापन बढ़ता है और दिल बेहतर तरीके से काम करने लगता है। इसके अलावा, यह दिमाग और नसों के मोटर यूनिट्स को एक्टिव कर देता है, जिससे बुजुर्गों को कुर्सी से उठने या एथलीट्स को अपनी परफॉरमेंस सुधारने में मदद मिलती है।

इन लोगों के लिए है फायदेमंद (Benefits & Accessibility)


इस वर्कआउट की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको किसी महंगे सामान या जिम की जरूरत नहीं है। आप इसे घर के अंदर, ऑफिस में या कहीं भी कर सकते हैं। खराब मौसम या बाहर जाने की झंझट भी नहीं है और इसमें बहुत ज्यादा पसीना भी नहीं निकलता। यह उन लोगों के लिए भी बहुत फायदेमंद है जिन्हें जोड़ों या मोबिलिटी की समस्या है और जो दौड़ने या वजन उठाने जैसी एक्सरसाइज नहीं कर सकते।

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज करने का सही तरीका (Proper Technique)


इसे शुरू करना बहुत आसान है। रिसर्च के अनुसार, आपको 2 मिनट के लिए एक पोज (जैसे वॉल स्क्वाट) होल्ड करना है, फिर 2 मिनट का आराम करना है। ऐसा कुल 4 बार करना है। ध्यान रहे कि पोज को पूरा समय (2 मिनट) देना जरूरी है। अगर आप दीवार के सहारे 90 डिग्री पर नहीं बैठ पा रहे, तो थोड़ा ऊपर (110-130 डिग्री) रहकर शुरू करें, लेकिन समय कम न करें। हालांकि कार्डियो वजन घटाने और स्टैमिना के लिए बेहतर है, लेकिन अगर आपका फोकस ब्लड प्रेशर पर है, तो हफ्ते में बस तीन बार ये 14 मिनट का सेशन आपको बड़े फायदे दे सकता है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि इसे अपने रुटिन में शामिल करने से पहले किसी अच्छे हेल्थ एक्सपर्ट या जिम ट्रेनर से जरूर सलाह लें।