
FSSAI Guidelines Fruits (photo- chatgtp)
FSSAI Guidelines Fruits: आजकल बाजार में मिलने वाले आम, केला और पपीता जैसे फलों को जल्दी पकाने के लिए शॉर्टकट अपनाए जा रहे हैं, जो आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकते हैं। इसी को लेकर Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने सख्त रुख अपनाया है और साफ कर दिया है कि कैल्शियम कार्बाइड जैसे केमिकल से फल पकाना पूरी तरह गैरकानूनी है।
फलों को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है, जो नमी के संपर्क में आकर एसिटिलीन गैस छोड़ता है। इसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे जहरीले तत्व हो सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक ऐसे फलों का सेवन करने से शरीर पर गंभीर असर पड़ सकता है।
रिसर्च प्लेटफॉर्म ScienceDirect के अनुसार, इसमें मौजूद आर्सेनिक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का जोखिम बढ़ा सकता है। इसके अलावा उल्टी, दस्त और पेट दर्द, सीने में जलन और सांस से जुड़ी समस्याएं। हार्मोनल असंतुलन और प्रजनन संबंधी दिक्कतें, फेफड़ों पर असर और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस का खतरा बना रहता है।
कैल्शियम कार्बाइड से बने टॉक्सिक तत्व सीधे नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। इससे सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी और फोकस में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक सेवन करने से याददाश्त कमजोर होना, चिड़चिड़ापन और मानसिक अस्थिरता भी देखी जा सकती है।
ऐसे फल खाने के कुछ ही घंटों में पेट दर्द, जी मिचलाना, उल्टी और डायरिया जैसी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं। शरीर इन टॉक्सिन्स को बाहर निकालने की कोशिश करता है, जिससे डाइजेस्टिव सिस्टम पर दबाव बढ़ता है।
फल अपने आप एथिलीन गैस छोड़कर धीरे-धीरे पकते हैं, लेकिन ज्यादा मुनाफे के लिए कुछ व्यापारी कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल कर प्रक्रिया को तेज कर देते हैं। यह सस्ता और जल्दी असर दिखाने वाला तरीका है, लेकिन सेहत के लिए बेहद जोखिम भरा है।
प्राकृतिक रूप से पके फलों में विटामिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में विकसित होते हैं। ये आपके शरीर को पोषण देते हैं और बीमारियों से बचाते हैं। इसके उलट, केमिकल से पके फलों में पोषण कम और नुकसान ज्यादा होता है।
FSSAI ने सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाए। फूड सेफ्टी कानून के तहत कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल पूरी तरह बैन है और नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है।साथ ही, एथिलीन गैस को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करने की अनुमति है, लेकिन इसके लिए भी सख्त गाइडलाइंस तय की गई हैं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
18 Apr 2026 03:07 pm
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