
Premanand Maharaj| image credit gemini
Premanand Maharaj: आज के दौर में हम सब चाहते हैं कि हमारे आसपास के लोग हमसे प्यार से पेश आएं और हर तरफ शांति बनी रहे। लेकिन असलियत यह है कि हम खुद अंदर से इतने परेशान और चिड़चिड़े रहते हैं कि चाहकर भी दूसरों को वह खुशी नहीं दे पाते जिसकी हम उम्मीद करते हैं।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Maharaj) एक बहुत गहरी बात समझाते हैं। उनका मानना है कि इंसान दूसरों को वही दे सकता है जो उसके खुद के पास होता है। अगर हमारे पास देने के लिए अंदर सुकून ही नहीं है, तो हम बाहर शांति कैसे फैला सकते हैं? आइए जानते हैं कि महाराज जी के अनुसार अपने अंदर प्रेम और शांति कैसे महसूस करें।
महाराज जी के अनुसार "जो अपने अंदर शांति और प्रेम को महसूस करता है वही दूसरों को भी शांति और प्रेम दे सकता है।" इसका अर्थ यह है कि हमारा मन एक बर्तन की तरह है और उसमें वही चीज बाहर छलकेगी जो उसके अंदर भरी होगी। अ
गर आपके मन में खुद के लिए गुस्सा, नफरत या बेचैनी भरी है, तो आप दूसरों के साथ कितना भी अच्छा बनने की कोशिश कर लें, आपके व्यवहार में कहीं न कहीं वह कड़वाहट आ ही जाएगी। महाराज जी हमें समझाते हैं कि असली सेवा या असली प्यार वह नहीं है जो हम ऊपर-ऊपर से दिखाते हैं, बल्कि वह है जो हमारे अंदर से अपने आप निकलता है।
अगर आप अपनी जिंदगी में इस बदलाव को लाना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत अपने अंदर झांकने से करनी होगी। सबसे पहले आपको खुद को शांत रखना सीखना होगा क्योंकि जब भी आप तनाव या गुस्से में होते हैं, तो आप अनजाने में दूसरों का भी दिन खराब कर देते हैं। इसलिए जब भी मन अशांत हो, तो थोड़ा रुककर भगवान का नाम लें या खुद को शांत करने की कोशिश करें ताकि आपके अंदर से दूसरों के लिए सिर्फ अच्छा ही निकले।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।
Published on:
18 Apr 2026 05:00 am
बड़ी खबरें
View Allलाइफस्टाइल
ट्रेंडिंग
स्वास्थ्य
