
Rail Parcel Rules(Image Source-'X')
जयपुर से एक जानकारी सामने आई कि करीब 1500 किलो मीट बेंगलुरु भेजा जा रहा था। इस दौरान नगर निगम हेरिटेज और ग्रेटर दोनों की पशु प्रबंधन टीम मौके पर पहुंच गई। उसके बाद मीट को अवैध बताते हुए कार्रवाई शुरू कर दी गई। अधिकारियों का कहना है कि मीट सप्लाई करने वाले एजेंट के पास कोई भी डाक्यूमेंट्स इसे लेकर नहीं था। जैसे स्लॉटर हाउस की रसीद या सर्टिफिकेट कुछ भी नहीं था।
कई सारी पार्सल कंपनियां होने के बावजूद भारतीय रेलवे देश में सबसे बड़े स्तर पर Parcel एक जगह से दूसरे जगह लेकर जाती है। सिर्फ यात्री ही नहीं, बल्कि पार्सल और माल पार्सल के लिए भी रेलवे एक भरोसेमंद साधन है। लोग अपने सामान, मशीनरी, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं और व्यावसायिक उत्पाद रेलवे पार्सल सेवा के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजते हैं। लेकिन रेलवे द्वारा पार्सल सेवा का उपयोग करने के लिए कुछ सख्त नियम और प्रतिबंध भी लागू हैं। इससे सुरक्षा के साथ-साथ पार्सल लाने, ले जाने में आसानी होती है।
रेलवे पार्सल सेवा यात्रियों और व्यापारियों को यह सुविधा देती है कि वे अपने निजी सामान, व्यावसायिक माल या वाहन को ट्रेन के जरिए देशभर में भेज सकें। इसके लिए रेलवे स्टेशन पर पार्सल ऑफिस की व्यवस्था होती है। सामान की बुकिंग के समय वजन, आकार और श्रेणी के हिसाब से पैसे लिए जाते है। रेलवे पूरे पार्सल की जिम्मेदारी लेता है, लेकिन शर्त यह है कि भेजा जाने वाला सामान रेलवे के नियमों के अनुरूप होना चाहिए।
ज्वलनशील पदार्थ- पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल, अल्कोहल, पेंट, केरोसिन, थिनर, माचिस, आतिशबाजी और बारूद जैसी वस्तुएं पार्सल में भेजना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
विस्फोटक और खतरनाक वस्तुएं- पटाखे, बम, डाइनामाइट, कारतूस, हथियार और किसी भी प्रकार की विस्फोटक सामग्री रेलवे पार्सल में नहीं भेजी जा सकती।
गैस सिलेंडर और रासायनिक पदार्थ- एलपीजी सिलेंडर, ऑक्सीजन सिलेंडर, जहरीली गैसें और जहरीले रसायन (एसिड, पारा, पोटैशियम साइनाइड आदि) रेलवे में वर्जित हैं।
नकदी और कीमती सामान- सोना, चांदी, हीरे-जवाहरात, नोट और अन्य कीमती धातुओं को पार्सल के जरिए भेजना नियमों के खिलाफ है।
नाजुक सामान- शीशे के सामान, नाजुक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या ऐसे आइटम जिन्हें आसानी से टूटने का खतरा हो, रेलवे पार्सल में स्वीकार नहीं किए जाते।
जीवित पशु-पक्षी- सामान्य पार्सल सेवा में जीवित जानवरों या पक्षियों को भेजने की अनुमति नहीं है। इनके लिए अलग से विशेष प्रावधान होते हैं।
भोजन सामग्री जो जल्दी खराब होती है- दूध, दही, मांस, मछली या कोई भी ऐसा सामान जो जल्दी खराब हो सकता है, पार्सल सेवा के तहत वर्जित है।
सही पैकिंग जरूरी है- रेलवे पार्सल में सामान तभी स्वीकार किया जाता है जब वह सुरक्षित तरीके से पैक हो। खराब पैकिंग की स्थिति में पार्सल रिजेक्ट हो सकता है।
वजन और आकार सीमा- हर पार्सल के लिए रेलवे ने वजन और आयाम की सीमा तय की है। निर्धारित सीमा से अधिक होने पर सामान की बुकिंग संभव नहीं होती।
बुकिंग रसीद (Receipt)- सामान बुक करते समय रेलवे द्वारा पार्सल रसीद जारी की जाती है। यह रसीद डिलीवरी के समय जरूरी होता है।
परिवहन का जोखिम- यदि कोई यात्री वर्जित वस्तु छुपाकर पार्सल करता है और दुर्घटना घटती है तो रेलवे जिम्मेदार नहीं होगा। साथ ही कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
किराया और शुल्क- पार्सल का किराया वजन, दूरी और केटेगरी के आधार पर तय होता है। रेलवे द्वारा शुल्क का पूरा डिटेल्स पार्सल ऑफिस में उपलब्ध होता है।
रेलवे रोजाना लाखों टन सामान और पार्सल ढोता है। ऐसे में यदि खतरनाक, ज्वलनशील या प्रतिबंधित वस्तुओं को अनुमति दे दी जाए तो यात्रियों और कर्मचारियों की जान पर खतरा हो सकता है। साथ ही ट्रेन और स्टेशन पर बड़ा हादसा भी हो सकता है। यही कारण है कि रेलवे ने इन वस्तुओं को पूरी तरह प्रतिबंधित किया है।
Published on:
18 Sept 2025 07:21 pm
बड़ी खबरें
View Allलाइफस्टाइल
ट्रेंडिंग
स्वास्थ्य
