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क्या वाकई संभव है “डोपामाइन डिटॉक्स”? जानिए फोन की रील और स्क्रॉलिंग की लत के पीछे का असली सच

Dopamine Detox in Hindi: आज के इस लेख में Dr. Charvi Kalra से विस्तार से जानते हैं कि डोपामाइन डिटॉक्स क्या होता है और यह हमारे शरीर पर क्या असर करता है।

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Dopamine Detox

Dopamine Detox| image credit gemini

Dopamine Detox in Hindi: आजकल सोशल मीडिया पर डोपामाइन डिटॉक्स (Dopamine Detox) शब्द काफी ज्यादा ट्रेंड में बना हुआ है। रील स्क्रॉल करते समय 10 में से 4-5 वीडियो आपको इससे जुड़ी दिख जाएंगी। किसी वीडियो में कोई इन्फ्लुएंसर कह रहा है कि फोन छोड़ दो, डोपामाइन डिटॉक्स अपने आप हो जाएगा, तो वहीं कोई इसके नुकसान के बारे में बता रहा है। ऐसे में आइए, Dr. Charvi Kalra से विस्तार से जानते हैं कि डोपामाइन डिटॉक्स क्या होता है और यह हमारे शरीर पर क्या असर करता है।

डोपामाइन डिटॉक्स क्या होता है? (What is Dopamine Detox?)


डोपामाइन डिटॉक्स एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सोशल मीडिया, गेमिंग या जंक फूड जैसी अत्यधिक उत्तेजक गतिविधियों से ब्रेक लिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दिमाग को रीसेट करना होता है ताकि आप सामान्य चीजों में फिर से आनंद ढूंढ सकें।

डोपामाइन कोई जहर नहीं है (Dopamine is Not a Toxin)


डॉ. चर्वी के अनुसार, डोपामाइन आपके शरीर का दुश्मन नहीं है। लोग डिटॉक्स शब्द का इस्तेमाल ऐसे करते हैं जैसे यह कोई नशा या जहर हो जिसे शरीर से बाहर निकालना है। सच तो यह है कि डोपामाइन आपके मूड, शरीर की मूवमेंट और मोटिवेशन को कंट्रोल करता है। अगर यह शरीर में न हो, तो लोग बिस्तर से उठने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे। इसलिए इसे खत्म करने की नहीं, बल्कि बैलेंस करने की जरूरत है।

फोन की लत ( Phone Addiction)


लोग घंटों रील क्यों देखते रहते हैं? क्योंकि हर एक रील या सोशल मीडिया नोटिफिकेशन दिमाग में डोपामाइन का एक छोटा सा स्पाइक देता है। जिससे लोग बार-बार फोन चेक करते हैं, जिससे दिमाग हाई लेवल की उत्तेजना का आदी हो जाता है और नॉर्मल लाइफ बोरिंग लगने लगती है। जिसके बाद से लोग इसी मजे के लिए बार-बार फोन उठाते हैं। इसी को ओवर-स्टिमुलेशन कहते हैं।

सब कुछ बंद करना समाधान नहीं है (The All-or-Nothing Myth)


अक्सर लोग जोश में आकर एक दिन के लिए फोन स्विच ऑफ कर देते हैं या सारे ऐप्स डिलीट कर देते हैं। लेकिन ऐसी कठोर पाबंदी ज्यादातर फेल हो जाती है। जब आप अचानक सब कुछ छोड़ते हैं, तो दिमाग में उसकी और ज्यादा तड़प (Cravings) पैदा होती है। नतीजा यह होता है कि आप एक दिन बाद फिर से उसी लत में और बुरी तरह फंस जाते हैं। समाधान फोन को पूरी तरह बैन करना नहीं, बल्कि उसका सही इस्तेमाल सीखना है।

इन टिप्स को करें फॉलो (Follow These Tips)


आज के डिजिटल दौर में फोन के बिना काम नहीं चलता, इसलिए बैलेंस बनाना ही एकमात्र रास्ता है। इसकी शुरुआत माइंडफुल स्क्रॉलिंग से करें। इसके अलावा, रात को सोने से एक घंटा पहले और सुबह उठने के एक घंटे बाद तक फोन को खुद से दूर रखें। साथ ही, अपनी स्क्रीन को ग्रे-स्केल मोड पर डाल दें।