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Changing Healthy lifestyle : ग्लोबल वार्मिंग से हमारी खाने की थाली (Healthy Lifestyle) के सीधा संबंध को लेकर कोई दो राय नहीं है। अगर इसमें बदलाव किया जाए, तो काफी हद तक खुद की सेहत सुधारी जा सकती है और पर्यावरण को सेफ किया जा सकता है। एक रिसर्च में यह खुलासा हुआ है। जर्नल नेचर फूड में इस बारे में कई हैरान कर देने वाले खुलासे हुए हैं। हम जिस तरह से भोजन का उत्पादन और उपभोग कर रहे हैं, उससे पर्यावरण काफी प्रभावित हो रहा है।
पशु आधारित उत्पादों की खपत
दो दशक में खाद्य आपूर्ति शृंखला से जुड़े उत्सर्जन में 14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। रिसर्च के मुताबिक तेजी से बढ़ती आबादी और पशु आधारित उत्पादों की बढ़ती खपत इस उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है। इस बारे में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक नए अध्ययन से पता चला है, पिछले 20 साल में खाद्य आपूर्ति शृंखला (Healthy Lifestyle) से जुड़े ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 14 फीसदी की वृद्धि हुई, जो कि 200 करोड़ मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर है। जर्नल नेचर फूड में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक उत्सर्जन में होती इस वृद्धि के लिए मुख्य तौर पर पशु आधारित उत्पादों की बढ़ती खपत जिम्मेवार है। अनुमान है कि इसने आहार से जुड़े बढ़ते उत्सर्जन में करीब 95 फीसदी का योगदान दिया है। विशेष रूप से इसमें बीफ और डेयरी उत्पादों का बड़ा हाथ है।
ये देश हैं जिम्मेदार
अपने इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 2000 से 2019 के खाद्य क्षेत्र से होते उत्सर्जन और उपभोक्ताओं से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इस विश्लेषण से पता चला है कि 2019 में पांच सबसे बड़े उत्सर्जक देश वैश्विक खाद्य आपूर्ति शृंखला से होने वाले 40 फीसदी से अधिक उत्सर्जन (Healthy Lifestyle) के लिए जिम्मेदार रहे। इसमें चीन की हिस्सेदारी करीब 200 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर, भारत की 130 करोड़ मीट्रिक टन, इंडोनेशिया की 110 करोड़ मीट्रिक टन रही। वहीं ब्राजील और अमरीका, दोनों ही 100-100 करोड़ मीट्रिक टन उत्सर्जन (Healthy Lifestyle) के लिए जिम्मेदार रहे हैं।
भोजन में बदलाव जरूरी
ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय और अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता प्रोफेसर क्लॉस हबसेक का इस बारे में कहना है कि वैश्विक स्तर पर इस बढ़ते उत्सर्जन से निपटने के लिए भोजन में बदलाव किया जाना जरूरी है। यह बदलाव न केवल बढ़ते उत्सर्जन पर लगाम लगाएगा, साथ ही सेहत के लिए भी बढिया (Healthy Lifestyle) रहेगा। यह मोटापे को दूर करेगा और हृदय संबंधी समस्याएं भी कम होंगी।
दरअसल चिंता की बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक अगले 27 साल में दुनिया की आबादी बढ़कर 910 करोड़ पर पहुंच जाएगी, तब हमें मौजूदा खाद्य उत्पादन में 70 फीसदी की वृद्धि करने की आवश्यकता होगी। ऐसे में खाद्य आपूर्ति शृंखला से होने वाले उत्सर्जन में भी वृद्धि हो जाएगी। इसलिए यह जरूरी है कि खाने की थाली में इसे रोकने से जुड़े खाद्य पदार्थ (Healthy Lifestyle) शामिल किए जाएं।
Published on:
25 Jun 2023 12:13 pm
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