
Hair Transplant Care प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो क्रेडिट- पत्रिका)
Hair Transplant Care: बढ़ता प्रदूषण, खराब जीवनशैली और पोषण की कमी इन वजहों से 25 से 40 साल के युवाओं में बाल झड़ने और गंजेपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एम्स की रिपोर्ट बताती है कि देश में हर साल करीब 60 लाख लोग हेयर फॉल से परेशान हैं। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर 'परफेक्ट लुक' का दबाव युवाओं को जल्दबाजी में कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की ओर धकेल रहा है।
हाल ही में कानपुर में एक इंजीनियर की हेयर ट्रांसप्लांट के बाद मौत इस बात का गंभीर इशारा है कि सावधानी न बरती जाए तो खूबसूरती की चाह जानलेवा भी हो सकती है। ऐसे में सुरक्षित विकल्पों और आयुर्वेदिक उपायों पर विचार करना बेहद जरूरी हो जाता है।
यह एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें सिर के एक हिस्से ( डोनर एरिया) से हेल्दी बालों के रूट्स (फॉलिकल्स) निकालकर गंजे या पतले बालों वाले हिस्से (रिसीपिएंट एरिया में प्रत्यारोपित किए जाते हैं। फॉलिक्यूलर यूनिट ट्रांसप्लांटेशन (FUT) तकनीक में सिर के पीछे से स्किन की एक स्ट्रिप निकाली जाती हैं जबकि फॉलिक्यूलर यूनिट एक्सट्रैक्शन (FUE) में एक-एक करके बालों की जड़ निकालते हैं।
जर्नल ऑफ कॉस्मेटिक सर्जरी की 2025 में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक हेयर ट्रांसप्लांट में निगेटिव केसेज की दर भले ही 4.7 फीसदी है. लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर और जानलेवा हो सकता है। इस स्टडी में 2.896 मरीजों के डेटा का अध्ययन किया गया, जिसमें पाया गया कि कुछ मरीजों में रिएक्शन और सेप्सिस (खून में इंफेक्शन) जैसी दिक्कतें सामने आई।
सर्जरी के दौरान यदि कुछ अहम बातों का ध्यान रखा जाए तो सर्जरी के बाद के संक्रमण या अन्य तरह के कॉम्पलिकेशन्स से बच सकते हैं, जानते हैं ये जरूरी बातें…
1. जब भी हेयर ट्रांसप्लांट करवाने जाए तो प्लास्टिक सर्जन या प्रशिक्षित सर्जन से ही मिलें, टेक्नीशियन या काउंसलर से मिलकर फैसला नहीं लें।
2 .प्लास्टिक सर्जन या हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन वहां पूर्णकालिक कार्य करने वाले हों, केवल पार्ट टाइम नहीं हों।
3. हेयर ट्रांसप्लांट सर्जरी में एनेस्थीसिया के समय एनेस्थेटिस्वं डॉक्टर उपस्थित होना चाहिए।
4. इमरजेंसी होने पर बेहोशी वाली मशीन हो, अस्पताल की सुविधा हो या पास में किसी बड़े अस्पताल से संबंध होना चाहिए।
5. स्टेरिलाइजेशन की अच्छी सुविधा हो। अलग से अच्छा स्टेरिलाइज्ड ओटी (ऑपरेशन थियेटर) होना चाहिए।
6. ऑपरेशन के बाद आपका संवाद और बातचीत सीधे प्लास्टिक सर्जन (ऑपरेटिंग सर्जन) से होना चाहिए। बीच में कोई स्टाफ या काउंसलर नहीं होना चाहिए, क्योंकि सर्जन तुरंत समस्या पहचान लेते हैं।
7. सर्जरी में कॉम्पिलिकेशन किसी से भी हो सकता है, लेकिन अगर आप सजग रहेंगे और केवल सोशल मीडिया और सस्ते के चक्कर में नहीं फंसेंगे तो इन कॉम्प्लिकेशन को कम कर सकते हैं
सर्जरी के कुछ दिन (4-5) बाद तक सीधा सोना है, करवट लेकर न सोएं।
सर्जरी के 2-3 दिन तक उसी शहर में रहें, जहां सर्जरी हुई है। पहली पट्टी क्लिनिक जाकर हटवाएं।
बालों पर केवल ऊपर से नॉर्मल सेलाइन का स्प्रे करें।
बाहर जाते समय सर्जरी टोपी पहनें। हेलमेट, नॉर्मल कैप 10-15 दिन बाद पहनें।
बाल धोते समय ऊपर से शैंपू का पानी या साफ पानी ही डालें, बालों के हाथ न लगाएं।
ट्रांसप्लांट वाली जगह पर कोई मक्खी, मच्छर न बैठे।
सर्जरी के बाद 2 हफ्ते तक स्विमिंग न करे।
डायबिटीज के मरीजों में घाव भरने की प्रक्रिया धीमी होती है, जिसके कारण सर्जरी के बाद इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
हार्ट डिजीज से जूझ रहे लोगों के लिए भी हेयर ट्रांसप्लांट सावधानी के साथ और कार्डियोलॉजिस्ट की देखरेख में ही करवाना चाहिए। दरअसल, ट्रांसप्लांट के दौरान दिए जाने वाले एनेस्थीसिया और एंटीबायोटिक दवाओं से एलर्जी हो सकती है। यह रिएक्शन एनाफिलेक्सिस (जानलेवा एलर्जी) का रूप ले सकता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में एलर्जी टेस्ट करवाने के बाद ही प्रक्रिया करवाएं।
जिन लोगों के स्कैल्प में एक्टिव सिकेट्रिशियल एलोपेसिया जैसे लाइकेन प्लानो पिलारिस या एलोपेसिया एरियाटा जैसी बीमारियां होती हैं, उनके लिए हेयर ट्रांसप्लांट विफल हो सकता है। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को भी दिक्कत हो सकती है।
Updated on:
25 May 2025 01:18 pm
Published on:
25 May 2025 01:18 pm
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