
Interview Fear and Gut Health: आप अक्सर पेट में बटरफ्लाइ, गैस या उबाक आने जैसी स्थिति महसूस करते होंगे। विशेष रूप से तब जब कोई इंटरव्यू देने जाते हैं या पोडियम पर कोई स्पीच देने के लिए कहा जाए। यह आमतौर पर देखा गया है कि हम पेट और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं दोनों के लक्षणों को एक साथ महसूस करते हैं।
यह अनुभव हमें ये सोचने पर भी मजबूर करता है कि कैसे पेट का स्वास्थ्य दिमागी सेहत पर असर डालता है। हमारी आंत में रहने वाले सूक्ष्मजीव जिन्हें सामूहिक रूप से माइक्रोबायोटा के रूप में जाना जाता है, जो पाचन, प्रतिरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को नियमित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें आए बदलाव से गट ब्रेन एक्सिस पर प्रभाव पड़ता है। गेस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लेक्स डिसऑर्डर यानि पेट की समस्याओं वाले व्यक्ति अक्सर चिंता, तनाव व अवसाद जैसी समस्याओं से ज्यादा जूझते हैं।
स्ट्रेस एक बड़ा फैक्टर (Due to Stress)
तनाव एक महत्त्वपूर्ण कारक है जो पेट और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं दोनों को बढ़ा सकता है। आंत का अपना नर्वस सिस्टम होता है जो तनाव और भावनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है। जब हम तनाव का अनुभव करते हैं तो ब्रेन आंत को संकेत भेजता है जिससे आंतों में कुछ बदलाव होते हैं जो पेट की समस्याओं को जन्म देते हैं या उन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
इंफ्लेमेशन और इम्यून सिस्टम (Inflamation and Immune System)
इम्यून सिस्टम अनियंत्रित होने की स्थिति में सूजन संबंधी प्रक्रियाएं पेट और मानसिक स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आंत में पुरानी सूजन से संरचनात्मक क्षति और शिथिलता हो सकती है जो आइबीएस जैसी स्थितियों में योगदान करती है। साथ ही न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर में भी परिवर्तन हो सकता है, जो हमारे मूड को नियंत्रित करता है।
प्रभावी उपचार (Effective Treatment)
पेट संबंधी समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को देखते हुए उपचार करना ज्यादा प्रभावी होता है। नियमित जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि एवं एक्सरसाइज, पौष्टिक आहार, उचित नींद, योग, हॉबीज को विकसित करना, सकारात्मक एवं भावनात्मक संवाद आदि दोनों ही प्रकार की समस्याओं के उपचार में मददगार हो सकते हैं। - डॉ. अखिलेश जैन, मनोरोग विशेषज्ञ, अहमदाबाद
Published on:
19 Feb 2024 12:45 pm
