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एक तरफ खाई, दूसरी तरफ मौत, क्या आपमें जिगरा है महादेव के इस सबसे खतरनाक धाम तक पहुंचने का? खुद देख लीजिए

Kinner Kailash Yatra: आज के इस लेख में हम देश के एक ऐसे रास्ते के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में से एक माना जाता है। यह रास्ता उन लोगों के लिए है जिन्हें खतरों से खेलने का शौक है या जो प्रकृति को उसके असली रूप में करीब से देखना चाहते हैं। आइए जानते हैं यह कौन सी जगह है।

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Hindustan Tibet Highway

Hindustan Tibet Highway| image credit gemini

Hindustan Tibet Highway: हिमाचल प्रदेश की किन्नौर घाटी में स्थित हिंदुस्तान-तिब्बत हाईवे दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में से एक माना जाता है। यह रास्ता उन लोगों के लिए है जिन्हें खतरों से खेलने का शौक है या जो प्रकृति को उसके असली रूप में करीब से देखना चाहते हैं। इस सफर की शुरुआत जितनी डरावनी लगती है, इसकी मंजिल उतनी ही सुकून देने वाली है। यहां का हर मोड आपको एक नए रोमांच से रूबरू कराता है और जब आप इस रास्ते के आखिरी छोर पर पहुंचते हैं, तो आपको महादेव के ऐसे रूप के दर्शन होते हैं जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएंगे।

खतरनाक चट्टानें और हाफ टनलिंग का जादू

किन्नौर की इन सडकों की सबसे डरावनी और हैरान कर देने वाली बात इसकी बनावट है। यहां के पहाड़ बाकी पहाड़ों की तरह कच्ची मिट्टी के नहीं, बल्कि बेहद सख्त और विशालकाय चट्टानों से बने हैं। इन भारी-भरकम पत्थरों को काटकर रास्ता बनाना लगभग नामुमकिन था, इसलिए इंजीनियरों ने यहां हाफ टनलिंग का रास्ता निकाला। इसमें पहाड़ को पूरी तरह नहीं काटा जाता, बल्कि बीच से इस तरह तराशा जाता है कि सड़क के ऊपर पहाड़ की एक छत सी बन जाती है। जब आप यहां से गुजरते हैं, तो आपके सिर के ठीक ऊपर ये भारी पत्थर होते हैं और साइड में हजारों फीट गहरी खाई, जहां झांकने भर से रोंगटे खडे हो जाते हैं।

महादेव का पवित्र धाम

इस चुनौतीपूर्ण रास्ते को पार करने के बाद आप किन्नर कैलाश पर्वत श्रृंखला के करीब पहुंचते हैं, जो करीब 6050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसे भगवान शिव और माता पार्वती का घर माना जाता है। यहां की सबसे बड़ी खासियत 79 फीट ऊंचा प्राकृतिक शिवलिंग है। यह शिवलिंग पूरी दुनिया में मशहूर है क्योंकि यह अद्भुत तरीके से दिन भर में कई बार अपना रंग बदलता है। सूरज की रोशनी के साथ इसका रंग कभी सफेद, कभी पीला तो कभी गहरा भूरा हो जाता है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं लगता।

कठिन ट्रेक और आस्था का इम्तिहान

इस ट्रेक को करने वाले अलवर जिले के सुरेंद्र कामिया बताते हैं कि किन्नर कैलाश की यात्रा करना कोई आसान काम नहीं है, यह शारीरिक और मानसिक रूप से काफी थकान भरा होता है। कठिन चढ़ाई और कम ऑक्सीजन की वजह से इसे सबसे मुश्किल ट्रेक्स में गिना जाता है, इसलिए श्रद्धालु और एडवेंचर के शौकीन लोग आमतौर पर अगस्त के महीने में यहां जाना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। इस रास्ते में शूटिंग स्टोन्स यानी ऊपर से अचानक गिरते पत्थरों का खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन महादेव के दर्शन की लालसा और नेचर को पास से देखने का शौक लोगों को यहां तक खींच लाता है।