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“ये फैसला माननीय नहीं”, जब सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर नाराज हुए थे प्रतीक यादव, उनके ‘दिल’ से जुड़ा था मामला

Prateek Yadav Passes Away: प्रतीक यादव को लोग मुलायम सिंह यादव के बेटे और अखिलेश यादव के भाई होने के अलावा जानवरों के प्रति उनके प्रेम के लिए भी जानते हैं। प्रतीक यादव जानवरों के लिए एक एनजीओ (NGO) भी चलाते थे और उनके हक के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक से भिड़ गए थे। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला।

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Prateek Yadav, Prateek Yadav Passes Away

Prateek Yadav Passes Away (file photo) image credit gemini and instagram- iamprateekyadav

Prateek Yadav Death News : मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव का 38 साल की उम्र में लखनऊ के सिविल अस्पताल में निधन हो गया। फिटनेस के शौकीन और राजनीति से हमेशा दूरी बनाए रखने वाले प्रतीक को सबसे ज्यादा उनके एनिमल लव यानी जानवरों के प्रति लगाव के लिए जाना जाता था। उनके निधन की खबर से उनके चाहने वालों और पशु प्रेमियों में शोक की लहर है।

आज हम एक ऐसे ही यादगार पल के बारे में जानेंगे जिसको प्रतीक ने कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर शेयर किया था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जताई थी नाराजगी (Prateek Yadav Expressed Disagreement with Supreme Court's Decision)

प्रतीक यादव ने करीब 26 हफ्ते पहले (11 नवंबर 2025 को) अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया था। उनके निधन के बाद अब भी यूजर्स कमेंट कर रहे हैं। इस वीडियो में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का कड़ा विरोध किया था, जिसमें सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था।

वीडियो में प्रतीक ने कहा था "नमस्कार मेरे देशवासियों, आज एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है, जिसे जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया ने दिया है। यह फैसला 'Honorable' (माननीय) नहीं है। वैसे तो सुप्रीम कोर्ट को हमेशा माननीय कहकर संबोधित किया जाता है, लेकिन यह फैसला वैसा नहीं है क्योंकि उन्होंने एक बहुत ही गलत निर्णय दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि हाई-एंड लोकेशन्स से गली के कुत्तों को उठाकर, उन्हें न्यूटर (नसबंदी) करके या तो शेल्टर होम में डाल दिया जाए, या फिर किसी दूसरे स्थानीय क्षेत्र में छोड़ दिया जाए।"

प्रतीक वीडियो में आगे समझाते हुए कहते है बताते है कि ” कुत्ते 'Territorial Animals' (प्रादेशिक प्राणी) होते हैं। अगर उन्हें उनके मूल इलाके से हटाकर किसी नई जगह छोड़ा जाएगा, तो वहां के पुराने कुत्ते उन पर हमला कर देंगे। उन्होंने कहा कि कुत्ते झुंड (Pack) में रहते हैं और किसी बाहरी कुत्ते को देखते ही उसे मार डालते हैं। उन्होंने इस फैसले को मानवता के खिलाफ और क्रूर बताते हुए लोगों से इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की थी। ”

बेजुबानों के लिए चलाते थे 'जीव आश्रय' संस्था (Prateek Yadav Founded Jeev Aashraya)

प्रतीक यादव सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने जमीन पर उतरकर जानवरों के लिए काम किया। उन्होंने जीव आश्रय नाम की एक संस्था बनाई थी, जो बीमार और घायल बेजुबानों का सहारा बनी। यह संस्था आवारा जानवरों का इलाज करने, उनके भोजन का प्रबंध करने और संकट में फंसे जानवरों का रेस्क्यू यानी बचाव करने का काम करती है।

प्रतीक की इंस्टाग्राम प्रोफाइल डॉग्स के तमाम पोस्ट से भरी है जो बताती है कि डॉग्स उनके दिल के कितने करीब थे।