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Stop Smoking: स्मोकिंग और हाई ब्लड प्रेशर से बढ़ सकता है स्ट्रोक का खतरा

Preventing Stroke : ब्रेन स्ट्रोक होने की कोई उम्र नहीं होती। हालाँकि बढ़ती उम्र के साथ इसे होने का रिस्क जरूर बढ़ जाता है लेकिन इन दिनों यह स्ट्रोक बच्चों से लेकर मिडिल एज और मेल से फीमेल सभी को हो रहा है। स्ट्रोक के कई कारण हैं जिनमें स्मोकिंग, हाई ब्लड प्रेशर, ओबेसिटी मुख्य है।

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Protect Your Health: Understanding the Link Between Smoking, Hypertension, Obesity, and Stroke Risk

Preventing Stroke : हमारे देश में स्ट्रोक यानी ब्रेन अटैक डेथ और डिसेबिलिटी का मुख्य कारण हैं। स्ट्रोक दो तरह के होते हैं। इस्केमिक और ब्रेन हेमरेज। इस्केमिक स्ट्रोक तब होता है जब किसी एक ब्रेन आर्टरी में ब्लॉकेज होता है। ब्रेन हेमरेज तब होता है जब ब्लड सप्लाई करने वाली आर्टरी फट जाती है या उसमें लीकेज होने लगती है। इंडियन कौंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार ऐसे कुछ कारण है जिनसे स्ट्रोक के चान्सेस बढ़ सकते हैं। भारत में 31 स्ट्रोक सेंटर्स में की गयी थी यह स्टडी। स्ट्रोक का रिस्क घटाने के लिए कुछ कारणों को ध्यान में रख कर बचाव का प्रयास किया जा सकता है। यहाँ दिए गए कारणों पर कंट्रोल करके स्ट्रोक होने का रिस्क काफी हद तक कम कर सकते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वो कारण।


High blood pressure
: यह इस्केमिक और हेमोररहाजिक स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर से स्ट्रोक होने की संभावना अधिक हो सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह आर्टरी की दीवारों को मोटा कर सकता है और कोलेस्ट्रॉल या अन्य फैट को बढ़ा सकता है जिससे प्लक़ुइस बन जाते हैं । यदि उनमें से एक भी फट जाए तो यह ब्रेन की ब्लड सप्लाई रुक जाती है। कई बार हाई ब्लड प्रेशर आर्टरी को कमजोर बना देता है जिससे वो बर्स्ट हो जाती है और यह हेमोररहाजिक स्ट्रोक का कारण बन जाता है।

High blood sugar : हाई ग्लूकोज लेवल शरीर की ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचा सकता है जिससे स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है।

High cholestrol : अन्हेल्थी लाइफस्टाइल और फ़ूड हैबिट्स से शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाता ह। कोलेस्ट्रॉल कण्ट्रोल करने की सलाह आमतौर पर हर डॉक्टर देते हैं। अगर इसपर समय रहते काबू नहीं किया जाए तो यह स्ट्रोक का कारण बन जाता है।

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Smoking and drinking : हार्ट अटैक की तरह ही स्मोकिंग और ड्रिंकिंग करने से मेन्टल स्ट्रोक होने के चान्सेस बढ़ सकते है। सिगरेट और शराब छोड़ने से स्ट्रोक होने का रिस्क कम हो सकता हैं। लंबे समय तक सेकेंड हैंड स्मोक एक्सपोजर होने पर भी स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है। न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर और लुधियाना के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ जयराज डी पांडियन ने एक ट्रायल को इन्वेस्टीगेट करते हुए बताया की ट्रायल के अनुसार एक ओर जहाँ स्मोकिंग पूरी तरह बंद करने वाले पेशेंट्स में 83% और शराब बंद करने वाले पेशेंट्स में 85% इम्प्रोवेर्मेंट नजर आया वहीं दूसरी ओर स्मोकिंग और ड्रिंकिंग पर थोड़ा कण्ट्रोल करने वाले पेशेंट्स में सिर्फ 78% और 75% सुधार हुआ

Unhealthy diet and obesity : अन्हेल्थी खाना खाने से वजन तो बढ़ता है ही साथ ही स्ट्रोक का रिस्क भी बढ़ जाता है। डॉक्टर्स का कहना है की एक्सरसाइज की कमी, अनफिट बॉडी, अन्हेल्थी डाइट और लाइफस्टाइल के साथ साथ ओबेसिटी भी स्ट्रोक के मुख्य कारणों में से हैं। वाकिंग, योग, ब्रीथिंग एक्सरसाइजेज और हेल्थी खाना खाने से इस रिस्क को कम किया जा सकता है। इंडियन कौंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के मुताबिक भारत में पहले स्ट्रोक के बाद लगभग 15 से 20% पेशेंट्स को दूसरा स्ट्रोक होता है। इसका मुख्य कारण हैं स्मोकिंग, ड्रिंकिंग, दवाइयों का बंद कर देना, बीपी, ब्लड शुगर पर नियंत्रण न होना और अन्हेल्थी फ़ूड खाना है।

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