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ठाकुरों के बाद अब ब्राह्मण विधायकों की सहभोज के नाम पर हुई बैठक, करीब 50 MLA हुए शामिल

यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के बीच ब्राह्मण विधायकों का बड़ा “जुटान” सत्ता के गलियारों में हलचल मचा रहा है। ठाकुरों के बाद अब ब्राह्मण विधायकों ने सहभोज के नाम पर बैठक कर बड़े संकेत दिए हैं।

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लखनऊ

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Mahendra Tiwari

Dec 24, 2025

वायरल फोटो ट्यूटर से

वायरल फोटो ट्यूटर से

उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है। लेकिन सियासी हलचल सदन के बाहर ज्यादा दिख रही है। इसी बीच ब्राह्मण विधायकों की एक बड़ी बैठक ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। इसे ब्राह्मण विधायकों का नया “जुटान” माना जा रहा है।

शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन मंगलवार शाम कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक (पंचानंद पाठक) के लखनऊ स्थित आवास पर ब्राह्मण विधायकों की बैठक हुई। इस बैठक में पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र से करीब 45 से 50 विधायक पहुंचे। खास बात यह रही कि इसमें केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि अन्य दलों से जुड़े ब्राह्मण विधायक भी शामिल हुए।

इनकी रही अहम भूमिका, सीएम के पूर्व सलाहकार भी हुए शामिल

बैठक में मिर्जापुर से विधायक रत्नाकर मिश्रा और एमएलसी उमेश द्विवेदी की अहम भूमिका बताई जा रही है। वहीं देवरिया से विधायक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूर्व मीडिया सलाहकार डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी भी बैठक में मौजूद रहे। इसके अलावा बांदा, बदलापुर, खलीलाबाद, नौतनवां, तरबगंज, मेहनौन सहित कई सीटों के विधायक शामिल हुए।

जाति आधारित राजनीति पर काई वर्ग हुए मजबूत, ब्राह्मण हाशिये पर महसूस कर रहा

सूत्रों के मुताबिक बैठक में ब्राह्मण समाज की मौजूदा स्थिति पर खुलकर चर्चा हुई। विधायकों का कहना था कि जाति आधारित राजनीति में कई वर्ग मजबूत हो गए हैं। लेकिन ब्राह्मण समाज खुद को हाशिये पर महसूस कर रहा है। उनका आरोप है कि संगठन और सरकार में उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा।

ठाकुर समाज के विधायकों ने भी इस तरह की थी बैठक, अब ब्राह्मण विधायक भी हो रहे एकजुट

इस बैठक को “सहभोज” नाम दिया गया है। यूपी विधानसभा में इस वक्त कुल 52 ब्राह्मण विधायक हैं। जिनमें से 46 भाजपा से हैं। इससे पहले मानसून सत्र के दौरान ठाकुर समाज के विधायकों ने भी इसी तरह की बैठक की थी। हाल ही में भाजपा नेता सुनील भराला द्वारा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की कोशिश और बाद में उसका रुकना भी इसी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं इटावा कथावाचक कांड के बाद ब्राह्मण समाज में असंतोष और बढ़ा है। सोशल मीडिया पर भी सरकार और विधायकों के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आ रही है।