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मायावती के पेंच से मुश्किल में अखिलेश, महागठबंधन को लेकर संदेह

लोकसभा चुनाव से पहले महागठबंधन को लेकर बड़ा पेंच फंसता नजर आ रहा है...
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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

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Updated: 7 Jun 2018, 6:12 PM IST

Akhilesh Mayawati

मायावती के पेंच से मुश्किल में अखिलेश, महागठबंधन को लेकर संदेह

लखनऊ. पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे को लेकर यूपी में होने वाले महागठबंधन को लेकर बड़ा पेंच फंसता नजर आ रहा है। प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर यूपी में महागठबंधन की धुरी बने रहे सपा-बसपा के बीच 36 का आंकड़ा है। मायावती प्रमोशन में आरक्षण की जबर्दस्त हिमायती हैं, वहीं अखिलेश इसके धुर-विरोधी हैं। ऐसे में दोनों दल इस मुद्दे पर क्या रणनीति अपनाएंगे, वक्त ही बताएगा। फिलहाल संभावित महागठबंधन में शामिल होने वाले संभावित दल इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर विपक्षी दलों की चुप्पी पर यूपी के भाजपा प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि अभी तक जो लोग प्रमोशन में आरक्षण की मांग कर रहे थे, अब वे ही इसके विरोध में हैं।

प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर सपा-बसपा के अलावा कांग्रेस के भी बड़े नेताओं ने चुप्पी साध रखी है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता व पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण बिल का विस्तृत अध्ययन करने के बाद ही हम इस मुद्दे पर कुछ बोल पाएंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर ने कहा कि अभी इस मुद्दे बात करना उचित नहीं है। क्योंकि मैं अभी प्रमोशन में आरक्षण बिल का अध्ययन कर रहा हूं। बसपा नेताओं ने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। पार्टी के एक सीनियर लीडर ने कहा कि पार्टी की ओर इस मुद्दे पर सिर्फ बसपा सुप्रीमो मायावती ही बोलेंगी।

प्रमोशन में आरक्षण : सपा-बसपा में 36 का आंकड़ा
उत्तर प्रदेश में जब मायावती के नेतृत्व में बसपा सरकार (2007-2012) बनी। सरकार ने शिक्षकों को मिलाकर लगभग 5000 राज्य कर्मचारियों को प्रमोशन किया गया था। इसके खिलाफ कुछ लोग अदालत भी गए, जहां इस पर रोक लगा दी गई। 2012 में जब सपा की सरकार सत्ता में आई तो उसने अपने चुनावी वादों के मुताबिक, प्रमोशन में आरक्षण का कोटा खत्म कर दिया। अखिलेश सरकार ने बसपा सरकार में प्रमोट हुए राज्यकर्मचारियों को फिर से रिवर्ट कर दिया। उत्तर प्रदेश में राज्य कर्मचरियों की संख्या करीब 18 लाख है, जिसमें आरक्षित सीटों के तहत नौकरी पाये लोगों की संख्या करीब पांच लाख है।

ओबीसी वोटरों पर भाजपा की नजर
2014 के लोकसभा चुनाव में ओबीसी वोटरों ने बीजेपी के लिये जमकर वोट किया था। लेकिन हालिया संपन्न हुए उपुचनावों के परिणाम देखते हुए लग रहा है कि ओबीसी वोटर बीजेपी से छिटक रहे हैं। ऐसे में प्रमोशन में आरक्षण के सहारे बीजेपी एक बार फिर वोट बैंक को सहेजने की जुगत में है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सहारा लेते हुए भाजपा नेताओं का कहना है कि ओबीसी को आरक्षण में आरक्षण दिलाए जाने की तैयारी की जा रही है।

आठ लाख दलित राज्यकर्मी आंदोलन को तैयार
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार लोकसभा से पदोन्नति बिल पास नहीं कराती, दलितों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। समिति के पदाधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के सभी आठ लाख दलित कर्मियों से आंदोलन के लिये तैयार रहने को कहा है। पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक लोकसभा में लम्बित संविधान संशोधन 117वां बिल पास नहीं हो जाता, दलित कर्मियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिलना संभव नहीं है।