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अखिलेश यादव और ब्रजेश पाठक की तीखी तकरार, डिप्टी सीएम बोले- हे कृष्ण, इन शिशुपालों का इलाज…

उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी का दौर जारी है। अब अखिलेश यादव और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक-दूसरे पर कटाक्ष किए हैं।

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लखनऊ

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Aman Pandey

May 18, 2025

up politics deputy cm brajesh pathak takes dig at samajwadi party know what he said lucknow news

उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी पर साधा निशाना। फोटो सोर्स: 'X'

उत्तर प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के दिए गए एक बयान पर सपा की प्रतिक्रिया के बाद सियासी विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में खुद सपा चीफ अखिलेश यादव भी कूद पड़े हैं। उन्होंने शनिवार रात एक लंबी पोस्ट लिखकर ब्रजेश पाठक को नसीहत दी है।

अखिलेश यादव ने दी नसीहत

अखिलेश ने शनिवार रात 'X' पर लिखा- हमने उप्र के उप मुख्यमंत्री जी की टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए, पार्टी स्तर पर उन लोगों को समझाने की बात कही है जो समाजवादियों के डीएनए पर दी गयी आपकी ‘अति अशोभनीय टिप्पणी’ से आहत होकर अपना आपा खो बैठे। आइंदा ऐसा न हो, हमने उनसे तो ये आश्वासन ले लिया है लेकिन आपसे भी यही आशा है कि आप जिस तरह की बयानबाज़ी निंरतर करते आये हैं उस पर भी विराम लगेगा। आप जिस स्तर के बयान देते हैं वो भले आपको अपने व्यक्तिगत स्तर पर उचित लगते हों लेकिन आपके पद की मर्यादा और शालीनता के पैमाने पर किसी भी तरह उचित नहीं ठहाराये जा सकते हैं ।

अखिलेश बोले- हम यदुवंशी हैं

अखिलेश ने आगे लिखा, "एक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में आपसे ये अपेक्षा तो है ही कि आप ये समझते होंगे कि किसी के व्यक्तिगत ‘डीएनए’ पर भद्दी बात करना दरअसल किसी व्यक्ति नहीं वरन् युगों-युगों तक पीछे जाकर उसके मूलवंश और मूल उद्गम पर आरोप लगाना है। जैसा कि सब जानते हैं कि हम यदुवंशी हैं और यदुवंश का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से है अतः ऐसे में आपके द्वारा हमारे डीएनए पर किया गया प्रहार धार्मिक रूप से भी हमें आहत करता है। हम जानते हैं कि आपका धर्म-प्रधान व्यक्तिक्त ऐसा नहीं है कि वो भगवान श्रीकृष्ण के प्रति ऐसी दुर्भावनापूर्ण टिप्पणी कर सकता है परंतु एक सामान्य भोला व्यक्ति जो भगवान श्रीकृष्ण ही नहीं बल्कि किसी भी भगवान में विश्वास करता है वो आपकी टिप्पणी को अन्यथा भी ले सकता है। ऐसे में आपसे आग्रह है कि राजनीति करते-करते न अपनी नैतिकता भूलिए और न ही धर्म जैसी संवेदनशील भावना को जाने-अंजाने में ठेस पहुंचाइए।

आशा है आप अपनी टिप्पणी के लिए अपने अंदर बैठे हुए उस अच्छे इंसान से क्षमा मांगेंगे, जो पहले ऐसा न था। आप यदि एकांत में बैठकर अपने विगत वर्षों के व्यवहार, विचार और व्यक्तित्व का निष्पक्ष अवलोकन-आलोचन करेंगे तो पाएंगे कि मूल रूप से आपके विचारों में पहले कभी भी ऐसा विचलन न था, न ही आपकी राजनीतिक आकांक्षाएं ऐसी थीं कि आप व्यक्तिगत स्तर पर आदर्श को भूल जाएं और अपना शाब्दिक संतुलन खो बैठें। आशा है इस बात को यहीं ख़त्म समझा जाएगा और राजनीति की शुचिता को बचाए-बनाए रखने के लिए आप नकारात्मक राजनीति की संगत से यथोचित दूरी बनाकर अपने विवेक और विचार को पुनः सही दिशा की ओर मोड़ेंगे। एक जनसेवक होने के नाते हम सबके पास जनसेवा के लिए वैसे भी समय हमेशा कम रहता है, ऐसे में व्यर्थ के विषयों में न उलझकर हमें सकारात्मक राजनीति के उद्देश्यों पर अडिग रहकर आगे बढ़ते रहना चाहिए।"

अखिलेश के बयान पर ब्रजेश पाठक का पलटवार

अब अखिलेश के इस बयान पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने रविवार को लिखा- सपा मीडिया सेल के साथी आलोचना करने के दौरान जिन शब्दों का प्रयोग करते हैं, उसे पढ़ कर लगता ही नहीं कि यह पार्टी राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र की पार्टी रह गई है। जार्ज साहब की बात तथाकथित "समाजवादी " भूल गए कि शिविर लगाया करो, पढ़ा - लिखा करो ।

'सपाइयों को लोहिया- जेपी पढ़ाइए'

अखिलेशजी ! सपाइयों को लोहिया- जेपी पढ़ाइए और पंडित जनेश्वर जी के भाषण सुनवाइए , ताकि इनके आचरण और उच्चारण में समाजवाद झलके। लोहिया की किताबें आप पर न हो तो मैं उपलब्ध करवा सकता हूं ………
हे महान लोहिया, जनेश्वरजी ! इन नादानों को क्षमा करें, इन्हें कुछ पढ़ाया - लिखाया , सिखाया व समझाया नहीं गया।

यह भी पढ़ें: जब DNA पर आई बात तो ब्रजेश पाठक ने अखिलेश से पूछे सवाल, कहा- क्या डिंपल जी इस स्त्री विरोधी मानसिकता को स्वीकार करेंगी?

'ये नहीं जानते कि समाजवाद क्या है ?'

ये नहीं जानते कि समाजवाद क्या है ? इन्होंने समाजवाद को गाली गलौज, उदंडई और स्तरहीन टिप्पणियों की प्रयोगशाला बना दिया है। जब विपक्ष में रहते हुए इनका ये रूप है तो सत्ता में होते हुए इन्होंने क्या किया होगा, सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता है। हैरानी ये भी कि उदंडता, अश्लीलता और अराजकता की संस्कृति के ये शिशुपाल अपने बचाव में योगेश्वर कृष्ण का नाम लेने का दुस्साहस भी कर लेते हैं। हे योगेश्वर कृष्ण, इन शिशुपालों का ऐसे ही उपचार करते रहना जैसे यूपी की जनता पिछले दस सालों से करती आ रही है। यही इनकी नियति होगी।