
Akhilesh yadav
लखनऊ. समाजावादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्वतंत्रता दिवस पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी व संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज से ठीक 71 साल पहले रात के 12 बजे देश की आजादी का ऐलान हुआ था। उस रात करोड़ों देशवासियों के मन में पराधीनता की श्रंखलाएं टूटने के साथ एक नए भविष्य की उम्मीद जगी थी। आज मैं उम्मीद की उसी किरण के हवाले से सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुभकामनाएं देता हॅू।
अखिलेश यादव ने कहा कि आज हम स्वतंत्रता संग्राम में भागीदार रहे उन सेनानियों को नमन करते हैं जिन्होंने अपने खून से इस गुलिस्तान को सींचा। हम अपनी सेना के जवानों को सलाम करते हैं जो आज भी क़ुरबानी दे कर अपने देश की रक्षा कर रहे हैं। आज़ादी के बाद भी देश को प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ाने में जिन करोड़ों भारतीयों का योगदान रहा हम उनको भी नमन करते हैं। आज़ादी की लड़ाई से लेकर आज तक महिलाओं ने, ना सिर्फ़ अपने परिवार बल्कि अपने देश के विकास में भी अहम भूमिका निभाई है। आने वाले दिनों में भी उनकी शक्ति से देश को ताक़त मिलेगी।
लोकतंत्र के हर एक स्तम्भ पर की जा रही गहरी चोट-
सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगे कहा कि लोकतंत्र में जनता की प्राथमिकता होती है और जनता के पक्ष तथा बुनियादी अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए संस्थानों की आवश्यकता होती है। परन्तु आज लोकतंत्र के हर एक स्तम्भ पर गहरी चोट की जा रही है। लोकतंत्र में अलग-अलग विचारधारायें एक साथ रह सकती हैं। यही इसकी खूबसूरती है। लेकिन आज वैचारिक असहमति रखने वाले हर भारतीय को देशद्रोही घोषित कर दिया जा रहा है। लोहिया जी कहते थे कि समता जीवन का उतना ही अहम लक्ष्य है जितना सत्य को खोजना। लेकिन आज धर्म, जाति, और प्रांत के नाम पर देशवासियों को बांट कर उनके बीच नफ़रत का बीज बोया जा रहा है।
... तभी विकास है संभव-
अखिलेश ने कहा कि मैं समझता हॅूं कि विकास केवल तभी सम्भव है जब लोगों को सुरक्षा, शिक्षा, और चिकित्सा की सुविधा न हो। देश एक परिवार की तरह होता है और यदि परिवार का कोई सदस्य किसी मुसीबत से जूझ रहा हो तो उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। हमें समझना होगा कि आर्थिक विकास तब तक सम्भव नहीं है जब तक हम हर वर्ग, हर जाति, हर धर्म और हर नागरिक को साथ लेकर न चलें।
भाजपा फैला रही नफरत-
उन्होंने कहा कि तथाकथित आर्थिक सुधार का असर हर वर्ग पर पड़ रहा है। कृषि से लेकर उद्योग तक सारे क्षेत्र कठिनाईयों का सामना कर रहे हैं। अगर सामाजिक अस्थिरता बढ़ती जाएगी तो आर्थिक स्थिरता असम्भव है। 2020 तक भारत विश्व का सबसे युवा देश बन जाएगा। लेकिन जिस देश के अन्नदाता किसान आत्महत्या कर रहे हों, उस देष की आने वाली पीढ़ी का भविष्य कैसा होगा? इस बात का क्या भरोसा है कि उन्हें एक सुरक्षित तथा गतिशील माहौल मिलेगा? शिक्षा स्वास्थ्य के क्षेत्र बदहाल है। बढ़ती बेरोज़गारी से देश के युवा बेचैन हैं। लेकिन इससे निपटने की बजाय सरकार नफ़रत फैला रही है और असली मुद्दों से भटकाने का काम कर रही है।
वादों से नहीं भरता पेट-
सपा अध्यक्ष ने कहा कि वादों से न तो किसी का पेट भर रहा है न किसी की प्यास बुझ रही है। ऐसे मोड़ पर समाजवाद का महत्व उजागर होता है क्योंकि समाजवाद एक विचारधारा है। देश का भविष्य आर्थिक समानता, सामाजिक न्याय और एकता से ही मज़बूत बनाया जा सकता है। यही सपना बाबा साहेब अम्बेडकर और लोहिया जी ने भी देखा था। आज हमें उनका सपना पूरा करने का संकल्प लेना होगा। आज मैं भारत के प्रत्येक नागरिक से अपील करता हॅू कि हम और आप मिल कर भारत की राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सौहार्द और भाईचारा को और मजबूती दें। हम देश के हर नागरिक के कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हों। आइए हम, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भारत के निर्माण में अपनी प्रतिबद्धता का संकल्प लेकर आजादी को सार्थक बनाये।
Published on:
14 Aug 2018 09:40 pm
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