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‘PDA’ में ‘PD’ का मतलब पंडित भी हैं, ब्राह्मणों को लेकर अखिलेश यादव का नया सियासी संदेश

Akhilesh Yadav Latest News: लखनऊ में जनेश्वर मिश्र जयंती कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने PDA की नई व्याख्या करते हुए कहा कि 'PD' का मतलब पंडित भी हैं। उन्होंने ब्राह्मण समाज से जुड़े कई मामलों का जिक्र करते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा।
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लखनऊ

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Harshul Mehra

Aug 06, 2026

akhilesh yadav pda pandit brahmin outreach lucknow

अखिलेश यादव का बड़ा बयान। फोटो सोर्स-पत्रिका न्यूज

Akhilesh Yadav Latest News: समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को पार्टी के संस्थापक नेताओं में शामिल समाजवादी चिंतक जनेश्वर मिश्र की जयंती पर एक ऐसा राजनीतिक संदेश दिया, जिसे उत्तर प्रदेश की बदलती सामाजिक और चुनावी राजनीति के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि PDA में मौजूद 'PD' का अर्थ केवल पिछड़े और दलित नहीं, बल्कि 'पंडित' भी हैं।

यह बयान ऐसे समय आया है जब समाजवादी पार्टी लगातार अपने सामाजिक गठजोड़ का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में PDA रणनीति के जरिए पार्टी को मिली सफलता के बाद अब उसके दायरे को और व्यापक बनाने के संकेत इस बयान में दिखाई दिए।

PDA की बदलती परिभाषा के पीछे क्या है राजनीतिक संदेश?

लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने PDA का अर्थ पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक बताया था। बाद में पार्टी ने इसमें आधी आबादी (महिलाएं), अगड़े और पीड़ित जैसे शब्द भी जोड़े। अब अखिलेश यादव ने कहा कि PDA में 'PD' पंडितों का भी प्रतीक है। उनका तर्क था कि ब्राह्मण समाज भी लंबे समय से भाजपा सरकार में पीड़ा झेल रहा है, इसलिए वह भी PDA का हिस्सा है। इस बयान पर पार्टी मुख्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं ने तालियां बजाकर स्वागत किया।

ब्राह्मण समाज से जुड़े मामलों का किया जिक्र

अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने सितंबर 2023 में सुल्तानपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर डॉ. घनश्याम तिवारी की हत्या का जिक्र किया। अखिलेश ने कहा कि उस घटना में आरोप लगे थे कि डॉक्टर को ड्रिल मशीन से प्रताड़ित किया गया था।

इसके अलावा उन्होंने विकास दुबे एनकाउंटर का भी उल्लेख किया। अखिलेश ने कहा कि वाहन पलटने की घटना को लेकर सभी जानते हैं कि क्या हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विकास दुबे जीवित रहता तो वह भाजपा सरकार के लिए असहज करने वाली बातें बता सकता था।

धार्मिक मामलों का भी उठाया मुद्दा

अखिलेश यादव ने अपने भाषण में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेले के दौरान संगम में स्नान से रोके जाने और बटुकों के अपमान का भी जिक्र किया। इन घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि ब्राह्मण समाज से जुड़े धार्मिक मुद्दों की भी अनदेखी हुई है।

जनेश्वर मिश्र की विरासत का किया उल्लेख

जनेश्वर मिश्र को याद करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा अपने ब्राह्मण नेताओं का सम्मान करती रही है। उन्होंने कहा कि छोटे लोहिया के नाम पर बना पार्क भी इस बात का उदाहरण है कि पार्टी ने समाजवादी विचारधारा से जुड़े नेताओं को सम्मान दिया।

राजनीतिक मायने

अखिलेश यादव का यह बयान केवल PDA की नई व्याख्या भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे ब्राह्मण मतदाताओं तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव में PDA रणनीति से मिली सफलता के बाद समाजवादी पार्टी अब अपने सामाजिक समीकरण को और व्यापक बनाने के संकेत देती नजर आ रही है। वहीं भाजपा पर ब्राह्मणों की उपेक्षा और अन्याय के आरोप लगाकर विपक्षी राजनीति का नया विमर्श खड़ा करने की कोशिश भी इस बयान में दिखाई देती है।