
7.5 किलोमीटर की दूरी तय करने में 50 मिनट लगने के दावे पर उठे सवाल, ट्रैफिक व्यवस्था और प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर बहस (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
Akhilesh Yadav Targets BJP Over Lucknow Traffic Chaos: राजधानी लखनऊ में बढ़ते ट्रैफिक जाम को लेकर अब सियासत भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि लखनऊ में महज 7.5 किलोमीटर की दूरी तय करने में 50 मिनट तक का समय लग रहा है, जो शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था को दर्शाता है।
अखिलेश यादव ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, जिसमें बताया गया कि लखनऊ में छोटी दूरी तय करने में भी लोगों को लंबा समय लग रहा है। उन्होंने इसे आम जनता की परेशानी बताते हुए कहा कि यह स्थिति प्रशासनिक विफलता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि राजधानी जैसे शहर में इस तरह की समस्या होना यह दर्शाता है कि ट्रैफिक प्रबंधन में कहीं न कहीं बड़ी खामियां हैं।
सपा अध्यक्ष ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के बजाय सरकार राजस्व बढ़ाने पर अधिक ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक पुलिस के माध्यम से आम जनता से ‘उगाही’ करवाई जा रही है। भाजपा सरकार हर तरह से पैसे कमाने में लगी है। ट्रैफिक पुलिस के जरिए खुलेआम वसूली हो रही है," उन्होंने अपने बयान में कहा।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में ‘AI’ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर भी तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के लिए AI का मतलब ‘आमदनी Income’ हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि तकनीक के नाम पर लोगों से जुर्माना वसूला जा रहा है।
सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि ट्रैफिक पुलिस चौराहों पर मौजूद रहने के बजाय आगे किसी मोड़ पर छिपकर खड़ी रहती है, ताकि लोग नियमों का उल्लंघन करें और उनसे चालान के नाम पर पैसे वसूले जा सकें। उन्होंने कहा कि "सरकार नहीं चाहती कि लोग नियमों का पालन करें, क्योंकि नियम तोड़ने पर ही उनसे वसूली संभव है।"
अखिलेश यादव ने लखनऊ में ट्रैफिक जाम के पीछे कई कारण भी गिनाए। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल एक कारण से नहीं, बल्कि कई कारकों के चलते उत्पन्न होती है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
उन्होंने कहा कि इन सभी कारकों को सुधारने के लिए सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति आवश्यक है।
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि अब वसूली के तरीके डिजिटल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन भुगतान के जरिए चालान की राशि किसी अन्य खाते में ली जाती है, जिससे पकड़े जाने का खतरा कम हो जाता है। इसके साथ ही उन्होंने सीसीटीवी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और कहा कि जरूरत पड़ने पर ही फुटेज सामने लाई जाती है, अन्यथा तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर मामलों को दबा दिया जाता है।
सपा अध्यक्ष ने कहा कि सबसे बड़ी समस्या सरकार की इच्छाशक्ति की कमी है। उनका आरोप है कि यदि सरकार चाहे तो ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है, लेकिन वर्तमान सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का ध्यान व्यवस्था सुधारने के बजाय राजस्व बढ़ाने पर अधिक केंद्रित है।
लखनऊ में ट्रैफिक जाम की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। ऑफिस जाने वाले लोग, छात्र और आम नागरिक रोजाना घंटों जाम में फंसे रहते हैं। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। अखिलेश यादव ने इसी मुद्दे को उठाते हुए इसे जनता से जुड़ा बड़ा सवाल बताया।
इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। जहां सपा सरकार पर निशाना साध रही है, वहीं भाजपा की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है, खासकर जब यह सीधे आम जनता की समस्या से जुड़ा हुआ है।
सूत्रों का मानना है कि लखनऊ जैसे तेजी से बढ़ते शहर में ट्रैफिक प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है। बेहतर सड़कें, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और जागरूकता अभियान इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
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Published on:
09 Apr 2026 01:58 pm
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