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इस बार AKTU में डायरेक्ट एडमिशन लेने पर देनी पड़ेगी ज्यादा फीस

एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों में जो छात्र डायरेक्ट एडमिशन लेने की सोच रहे हैं उन्हें इस बार ज्यादा फीस देनी पड़ सकती है।

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इस बार AKTU में डायरेक्ट एडमिशन लेने पर देनी पड़ेगी ज्यादा फीस

लखनऊ. यूपीएसईई काउंसलिंग के बजाए एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों में जो छात्र डायरेक्ट एडमिशन लेने की सोच रहे हैं उन्हें इस बार ज्यादा फीस देनी पड़ सकती है। एकेटीयू जुलाई के पहले हफ्ते में सीधे दाखिले के लिए आवेदन शुरू करेगा। दाखिले मैनेजमेंट कोटे व खाली सीटों पर लिए जाएंगे।पिछली बार सीधे दाखिला लेने पर अभ्यर्थियों को महज पांच सौ रुपए पंजीकरण फीस चुकानी पड़ी थी। पर इस बार इस फीस में 2500 का इजाफा कर दिया गया है।

यूनिवर्सिटी ने बताया ये कारण

यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि यूपीएसईई के जरिए अधिक से अधिक दाखिले हों इसलिए फीस बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। बता दें कि इस बार भी एक चौथाई से ज्यादा सीटें खाली रह सकती हैं। खासकर एमबीए और एमसीए जैसे कोर्सों में अभ्यर्थियों की नापसंदी सूची में शीर्ष पर है। यही वजह है कि इन कोर्सों में एक चौथाई सीटों पर दाखिला होना संभव नहीं है। वहीं कई अन्य कोर्सों में भी सीटों की संख्या की तुलना में अभ्यर्थियों की संख्या कम है।

एकेटीयू ने कुल 13 पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या उम्मीदारों से अधिक है। इसमें मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए), एमबीए (इंटीग्रेटेड), मास्टर ऑफ कम्प्यूटर ऍप्लिकेशन, एमसीए (इंटीग्रेटेड), बैचलर ऑफ होटल मैनेजमेंट कैटरिंग टेक्नोलॉजी (बीएचएमसीटी) कोर्स शामिल है।

एमबीए की सबसे अधिक खाली रहेंगी सीटें


प्रदेश भर के संस्थानों में कुल 31 हजार 919 सीटें हैं। इस बार एमबीए में दाखिले के लिए 6816 अभ्यर्थी यूपीएसईई के जरिए शामिल हुए। इनमें से 6434 अभ्यर्थी पास हुए। अगर सभी चयनित अभ्यर्थी भी दाखिला लेते हैं, फिर भी 25,485 सीटें खाली रहेंगी। वहीं एमसीए में 4617 सीटें हैं, जबकि केवल 1487 अभ्यर्थियों का ही चयन हुआ है। इसमें 3130 सीटें खाली रहेंगी। यही स्थिति बीएचएमसीटी और एमसीए (एकीकृत) कोर्सों की है।

अब डायरेक्ट एडमिशन से उम्मीद

एकेटीयू जल्द ही विभिन्न पाठ्यक्रमों में सीधे दाखिले के लिए आवेदन शुरू करेगा। इसके लिए विवि प्रशासन तैयारी कर रहा है। इसी के जरिए खाली सीटों को भरने की जद्दोजहद विवि करेगा। अगर सीधे दाखिलों से भी सीटें न भरीं तो उसके बाद कोई विकल्प नहीं रहेगा।

सीटें कम करने के बावजूद है ये हालत

पिछले वर्ष सभी संस्थानों को मिलकर करीब 54 फीसदी सीटें खाली रहीं। इस स्थिति को देखते हुए इस बार पहले ही एकेटीयू प्रशासन ने प्रदेश भर के संस्थानों के विभिन्न पाठ्यक्रमों की 17833 सीटें कम कर दी थीं। सीटें कम करने के बाद भी सीटें भरना मुश्किल हो रहा है।