
लखनऊ. प्रदेश के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी में इस बार लगभग 30 हजार सीटें कम हो जाएंगी। एकेटीयू की मान्यता लौटाने के लिए अब तक 41 कॉलेज आवेदन कर चुके हैं। इसमें एनसीआर और मेरठ के कॉलेजों की संख्या ज्यादा है। इन कॉलेजों में करीब बीस हजार सीटें हैं। 19 कॉलेजों की मान्यता पहले ही समाप्त होने से लगभग दस हजार सीटें कम हो चुकी हैं। ऐसे में इस साल तीस से 35 हजार से अधिक सीटें कम हो जाएंगी।
इसे इंजीनियरिंग में घटते क्रेज के तौर पर भी देखा जा सकता है। इस साल के दाखिलों पर नजर डालें तो आधी सीटें खाली ही रह गईं थी। प्रदेश के कॉलेजों में बीटेक, एमबीए, बीफार्मा समेत सभी पाठ्यक्रमों की कुल 1.46 लाख सीटों पर काउंसलिंग हुई थी। कई चरणों में काउंसलिंग के बाद भी बमुश्किल 73 हजार सीटें ही भर सकीं। 19 इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों को प्रोग्रेसिव क्लोजर के तहत पहले ही बंद किया जा चुका है।
जानकारों की मानें तो कैंपस प्लेसमेंट न होने से स्टूडेंट निजी कॉलेजों में एडमिशन लेने से कतराने लगे हैं। वहीं स्कॉलरशिप के नाम पर होने वाला खेल भी खत्म हो गया हे। पहले एससी-एसटी के फर्जी एडमिशन लेकर प्रबंधकों को समाज कल्याण से फीस मिल जाती थी। ऐसे में कमाई का जरिया बंद होने से कॉलेज खुद सम्बद्धता खत्म करने के लिए आवेदन कर रहे हैं।
भुवनेश कुमार( सचिव, प्राविधिक शिक्षा) का कहना है कि मान्यता समाप्ति के लिए आवेदन आ रहे हैं, सभी पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी है।
एकेटीयू में पिछले तीन सालों में लगभग 50 हजार सीटें कम हो गई है। साल 2015 में एकेटीयू ने लगभग 1.91 लाख सीटों पर दाखिले लिए थे। 2016 में 22 हजार सीटें घटने के बाद 1.69 लाख सीटों पर एडमिशन हुए। जबकि 23 हजार सीटें और घटने से इस बार 1.46 लाख सीटों पर एडमिशन हुए। वहीं अगले साल अब तीस हजार से अधिक सीटें और कम होने के आसार है।
Published on:
12 Jan 2018 12:43 pm
