
सोना-चांदी के मानक रेट जारी, ग्राहकों को राहत संकेत (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Gold Rate Today Market Update: देशभर के सर्राफा बाजार में मजदूरी और रेट को लेकर लंबे समय से असमानता देखी जाती रही है। अलग-अलग शहरों, बाजारों और ज्वेलर्स के अपने-अपने रेट होने से ग्राहकों को अक्सर भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता है। इसी परिप्रेक्ष्य में ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ तथा सर्राफा एसोसिएशन ने एक ब्रांडेड दर प्रणाली की तर्ज पर खुदरा ग्राहकों के लिए मानक बिक्री दर (Sales Rate) जारी करने की पहल की है।
एसोसिएशन की ओर से जारी रेट 10 ग्राम के हिसाब से खुदरा ग्राहकों के लिए निर्धारित किए गए हैं। हालांकि स्पष्ट किया गया है कि इन दरों में जीएसटी, मेकिंग चार्ज और हॉलमार्क शुल्क अतिरिक्त रूप से जोड़े जाएंगे। इस कदम को बाजार में पारदर्शिता और एकरूपता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
(नोट: उपरोक्त दरें खुदरा ग्राहकों के लिए हैं। जीएसटी, मेकिंग और हॉलमार्क शुल्क अलग से देय होंगे।)
सर्राफा बाजार में लंबे समय से यह समस्या रही है कि हर ज्वेलर अपनी मजदूरी (मेकिंग चार्ज) अलग-अलग तय करता है। किसी दुकान पर 8% मजदूरी लगती है तो कहीं 15% तक वसूली जाती है। इसी तरह हॉलमार्क और अन्य शुल्कों को लेकर भी स्पष्टता की कमी रहती है। ग्राहक अक्सर सोने की शुद्धता और अंतिम बिल को लेकर उलझन में पड़ जाते हैं। अलग-अलग दुकानों पर रेट में अंतर होने से भरोसे की कमी भी महसूस होती है। ऐसे में एसोसिएशन की यह पहल ग्राहकों के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ का कहना है कि जिस तरह बड़े ब्रांड अपने उत्पादों की एक समान कीमत तय करते हैं, उसी तर्ज पर सर्राफा बाजार में भी एक मानक दर प्रणाली लागू की जानी चाहिए। इससे ग्राहकों को यह भरोसा रहेगा कि वे देश के किसी भी हिस्से में जाएं, उन्हें लगभग समान आधार दर पर सोना-चांदी मिलेगा। हालांकि बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सोने-चांदी के भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की कीमत और मांग-आपूर्ति के आधार पर रोज बदलते रहते हैं। ऐसे में यह दरें भी समय-समय पर संशोधित होती रहेंगी।
जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं, जिससे कीमतों में तेजी आती है। वहीं स्थिर आर्थिक माहौल में मांग कम होने पर दाम गिर भी सकते हैं। हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण सोने-चांदी के भाव में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है। ऐसे में एक मानक दर जारी करना ग्राहकों को दैनिक आधार दर की स्पष्ट जानकारी देने का प्रयास है।
इस पहल से ग्राहकों को तीन प्रमुख लाभ मिलने की उम्मीद है:
हालांकि अंतिम कीमत में मेकिंग चार्ज और जीएसटी का महत्वपूर्ण योगदान होता है, इसलिए ग्राहकों को खरीदारी से पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है।
कुछ ज्वेलर्स का मानना है कि यह कदम बाजार में प्रतिस्पर्धा को संतुलित करेगा। वहीं कुछ का कहना है कि हर शहर और बाजार की लागत अलग होती है, इसलिए पूर्ण एकरूपता व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है।फिर भी अधिकांश व्यापारियों का मत है कि एक न्यूनतम मानक दर घोषित होने से ग्राहकों के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा और अनावश्यक भ्रम की स्थिति कम होगी।
सोने की खरीद में हॉलमार्किंग बेहद महत्वपूर्ण है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रमाणित हॉलमार्क सोने की शुद्धता की गारंटी देता है। 22 कैरेट सोना 92% शुद्ध माना जाता है, जबकि 18 कैरेट में 76% शुद्ध सोना होता है। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे केवल हॉलमार्क युक्त आभूषण ही खरीदें और बिल अवश्य लें।
आने वाले महीनों में यदि शादी और त्योहारों का सीजन शुरू होता है तो सोने-चांदी की मांग में वृद्धि देखी जा सकती है। पारंपरिक रूप से भारतीय परिवार निवेश और आभूषण दोनों दृष्टि से सोना खरीदना पसंद करते हैं। एसोसिएशन का मानना है कि मानक रेट प्रणाली से त्योहारों के दौरान खरीदारी में पारदर्शिता और सुगमता आएगी।
Published on:
19 Feb 2026 10:02 am
