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Tax Recovery: नगर निगम लखनऊ के खाते में 35.16 करोड़ की सबसे बड़ी वसूली, हाईकोर्ट प्रशासन ने चुकाया लंबित हाउस टैक्स

Tax Recovery Lucknow Municipal Corporation: राजधानी में बड़ी राजस्व उपलब्धि दर्ज करते हुए नगर निगम लखनऊ के खाते में 35.16 करोड़ रुपये की अब तक की सबसे बड़ी बकाया वसूली जमा हुई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय प्रशासन ने लंबित हाउस टैक्स का भुगतान RTGS के माध्यम से किया, जिससे निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 19, 2026

इलाहाबाद उच्च न्यायालय प्रशासन ने 35.16 करोड़ रुपये हाउस टैक्स का किया भुगतान (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

इलाहाबाद उच्च न्यायालय प्रशासन ने 35.16 करोड़ रुपये हाउस टैक्स का किया भुगतान (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Tax Recovery Nagar Nigam: लखनऊ में नगर निगम प्रशासन ने बकाया वसूली के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। नगर निगम लखनऊ के खाते में अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त बकाया राशि दर्ज हुई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय प्रशासन ने हाउस टैक्स के रूप में 35.16 करोड़ रुपये का भुगतान आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से सीधे नगर निगम के खाते में ट्रांसफर किया। यह राशि वर्ष 2016 से लंबित हाउस टैक्स असेसमेंट के निपटारे के बाद जमा की गई है। दो वर्षों तक चली प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के बाद यह ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई है।

दो वर्षों की कवायद के बाद सफलता

नगर निगम सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2016 से संबंधित हाउस टैक्स असेसमेंट का मामला लंबे समय से लंबित था। विभागीय स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन, असेसमेंट की पुनः गणना और आपसी समन्वय की प्रक्रिया में समय लगा। करीब दो वर्षों तक लगातार प्रयास, पत्राचार और बैठकों के बाद अंततः यह बकाया राशि जमा हो सकी। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल वित्तीय उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता और समन्वय का परिणाम है।

RTGS के जरिए 35.16 करोड़ सीधे खाते में

हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा 35.16 करोड़ रुपये की राशि RTGS के माध्यम से नगर निगम खाते में ट्रांसफर की गई। डिजिटल भुगतान की इस प्रक्रिया से न केवल पारदर्शिता बनी रही, बल्कि भुगतान में किसी प्रकार की देरी या तकनीकी बाधा भी नहीं आई। नगर निगम के वित्त विभाग ने राशि प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए इसे अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त बकाया वसूली बताया है।

जोन-4 की टीम ने रचा इतिहास

इस ऐतिहासिक वसूली में नगर निगम के जोन-4 की टीम की भूमिका बेहद अहम रही। अधिकारियों के अनुसार, जोन-4 ने रिकॉर्ड कलेक्शन करते हुए 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक कुल 126.18 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज की जा चुकी है, जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि यह उपलब्धि टीमवर्क, निरंतर निगरानी और सख्त अनुश्रवण का परिणाम है।

पहली बार 75 करोड़ का कलेक्शन करने वाले टैक्स इंस्पेक्टर

इस वित्तीय वर्ष में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की गई है। पहली बार किसी टैक्स इंस्पेक्टर ने अकेले 75 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह व्यक्तिगत स्तर पर भी रिकॉर्ड उपलब्धि है। संबंधित अधिकारी के प्रयासों और सतत फॉलोअप के कारण लंबित बकाया की बड़ी राशि वसूल की जा सकी।

पिछले साल के रिकॉर्ड के करीब पहुंचा चालू वित्तीय वर्ष

नगर निगम प्रशासन के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष की वसूली पिछले वर्ष के रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच चुकी है। यदि इसी गति से वसूली जारी रही, तो इस वर्ष नया रिकॉर्ड बन सकता है। नगर निगम की आय में वृद्धि से शहर के विकास कार्यों को गति मिलेगी। सड़क, नाली, सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।

प्रशासन ने दी टीम को बधाई

इस उपलब्धि पर नगर निगम प्रशासन ने पूरी टीम को बधाई दी है। नगर आयुक्त ने विशेष रूप से अपर नगर आयुक्त पंकज श्रीवास्तव को सम्मानित किया और उनके नेतृत्व की सराहना की। अधिकारियों ने कहा कि यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि विश्वास और पारदर्शिता की भी जीत है। बड़े संस्थानों द्वारा समय पर कर भुगतान से अन्य करदाताओं को भी सकारात्मक संदेश जाता है।

राजस्व बढ़ने से विकास को मिलेगी रफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत होने से विकास कार्यों में तेजी आएगी। शहर में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने, स्वच्छता अभियान को गति देने और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में यह राशि सहायक सिद्ध होगी। बकाया वसूली पर विशेष ध्यान देने से निगम की आर्थिक सेहत में सुधार आया है। इससे भविष्य में भी कर संग्रहण को लेकर सकारात्मक माहौल बनेगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही का संदेश

नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बकाया वसूली की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और पारदर्शिता के तहत की गई। असेसमेंट और भुगतान की पूरी प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण किया गया है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और समन्वय हो, तो वर्षों से लंबित मामलों का भी समाधान संभव है।