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लखनऊ में योगी-भागवत मुलाकात, 2027 चुनावी रणनीति पर 40 मिनट गहन मंथन

Yogi Meets Mohan Bhagwat : लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के बीच अहम मुलाकात हुई। करीब 40 मिनट चली इस बैठक को 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति, संगठन–सरकार समन्वय और प्रदेश की राजनीतिक दिशा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 19, 2026

2027 विधानसभा चुनाव से पहले रणनीतिक मंथन, संगठन–सरकार समन्वय पर जोर   (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group) 

2027 विधानसभा चुनाव से पहले रणनीतिक मंथन, संगठन–सरकार समन्वय पर जोर   (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group) 

Yogi Adityanath Meets Mohan Bhagwat in Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के सरसंघचालक मोहन भागवत के बीच राजधानी लखनऊ में अहम मुलाकात हुई। करीब 40 मिनट तक चली इस बैठक को प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघ प्रमुख इन दिनों लखनऊ के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित संघ कार्यालय पहुंचकर उनसे भेंट की। सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात पूरी तरह औपचारिक होते हुए भी राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

संगठन और सरकार के बीच समन्वय पर चर्चा

सूत्र बताते हैं कि बैठक में प्रदेश सरकार की योजनाओं, संगठनात्मक गतिविधियों और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण राष्ट्रीय राजनीति में भी निर्णायक भूमिका निभाता है। ऐसे में संघ और सरकार के बीच समन्वय की रणनीति पर विचार-विमर्श को स्वाभाविक रूप से अहम माना जा रहा है।

जानकारों का कहना है कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक मजबूती, सामाजिक समरसता और विकास कार्यों की गति को लेकर गहन चर्चा हुई होगी। पिछले कुछ महीनों में विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों, सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय चुनौतियों को लेकर भी विचार किया गया हो सकता है।

2027 चुनाव की रणनीतिक तैयारी

उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत हासिल किया था। अब पार्टी की निगाह 2027 पर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी पहले से हो रही रणनीतिक बैठकों से स्पष्ट है कि संगठन और सरकार दोनों ही आगामी चुनाव को लेकर सतर्क और सक्रिय हैं।

2027 का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न केवल प्रदेश की सत्ता तय करेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा पर भी असर डालेगा। ऐसे में संघ और सरकार के बीच तालमेल को और मजबूत करना, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरना तथा सामाजिक आधार को व्यापक बनाना प्राथमिकता हो सकती है।

विकास और सुशासन के मुद्दे पर जोर

बैठक में प्रदेश में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। बुनियादी ढांचे के विस्तार, औद्योगिक निवेश, कानून-व्यवस्था की स्थिति और रोजगार सृजन जैसे मुद्दे सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने और निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को अपनी सरकार की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं। ऐसे में संघ नेतृत्व के साथ इन मुद्दों पर फीडबैक और सुझावों का आदान-प्रदान स्वाभाविक है।

सामाजिक समीकरण और जनसंपर्क अभियान

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बैठक में सामाजिक समीकरणों पर भी चर्चा हुई होगी। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन हमेशा से अहम रहा है। संघ की जमीनी पकड़ और उसके कार्यकर्ताओं का व्यापक नेटवर्क चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संभावना है कि आगामी महीनों में सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए विशेष जनसंपर्क अभियान चलाए जाएं। इसके लिए संगठन और सरकार के बीच तालमेल को और सुदृढ़ करने पर बल दिया गया होगा।

दो दिवसीय दौरे का महत्व

संघ प्रमुख मोहन भागवत का यह दौरा सामान्य शिष्टाचार भेंट से कहीं अधिक मायने रखता है। संघ समय-समय पर राज्यों के दौरे कर संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करता है और कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करता है। लखनऊ प्रवास के दौरान भी संघ प्रमुख विभिन्न बैठकों और कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री के साथ हुई यह मुलाकात उसी व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें संगठन और सरकार के बीच संवाद को मजबूत करना प्रमुख उद्देश्य है।

विपक्ष की नजर भी बैठक पर

इस मुलाकात पर विपक्षी दलों की भी पैनी नजर है। विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं दे सकता है। हालांकि, सत्तारूढ़ पक्ष इसे सामान्य संगठनात्मक संवाद और मार्गदर्शन की प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में संघ की भूमिका हमेशा से प्रभावशाली रही है। ऐसे में संघ प्रमुख और मुख्यमंत्री की मुलाकात को केवल औपचारिक भेंट मानना उचित नहीं होगा।

भविष्य की दिशा तय करने वाला संवाद

करीब 40 मिनट चली इस बैठक के औपचारिक विवरण भले ही सार्वजनिक न किए गए हों, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ दूरगामी माने जा रहे हैं। 2027 की तैयारी, संगठनात्मक विस्तार, सामाजिक संतुलन और विकास के एजेंडे को लेकर यह बैठक एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रदेश की राजनीति में आने वाले महीनों में जो भी हलचल होगी, उसकी पृष्ठभूमि में इस तरह की रणनीतिक बैठकों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।