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ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड- इस्लाम में चार शादियां करने की इजाजत, अदालत के फैसले पर सवाल

All India Personal Law Board Workshop: लखनऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि इस्लाम में चार शादियां करने की छूट दी गई है जबकि अन्य धर्म में बहु विवाह की प्रथा चल रही है।
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लखनऊ

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Narendra Nath Awasthi

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Updated: 21 May 2026, 3:32 PM IST

प्रतीकात्मक फोटो, फोटो सोर्स- ChatGPT

फोटो सोर्स- ChatGPT

Workshop of All India Muslim Personal Law Board: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के अंतिम दिन मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों में अदालतों के हालिया फैसलों को लेकर चिंता जताई गई। बोर्ड से जुड़े वक्ताओं ने इन फैसलों को कथित तौर पर पक्षपातपूर्ण बताते हुए मुस्लिम समाज में कानूनी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, किसी विशेष फैसले का नाम नहीं लिया गया।

अदालत के फैसले को पक्षपात पूर्ण बताया गया

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला को संबोधित करते हुए पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि अदालत के हालिया फैसलों में मुसलमानों के प्रति पक्षपातपूर्ण पूर्ण रवैया दिखाई पड़ा है। जिसमें शरण के खिलाफ निर्णय दिया गया। उन्होंने इस्लामी शरीयत के प्रति लोगों को जागरूक करने को कहा। इसके साथ ही कानून के विषय में भी सभी को जानकारी दी जाए। जिससे कि कानूनी प्रक्रिया में उन्हें राहत मिल सके।

इस्लाम में चार शादियां करने की छूट

उन्होंने कहा कि इस्लाम में चार शादियां करने तक की छूट दी गई है, जिससे कि समाज में न्याय और संतुलन बना रहे। जबकि दुनिया के कई धर्मों में बहु बहुविवाह की प्रथा है। जिसमें कोई संख्या सीमित नहीं है, इस्लाम चार निकाह करने की इजाजत देता है।

‌सोशल मीडिया पर भी सवाल उठाया गया

कार्यशाला में वक्ताओं ने सोशल मीडिया पर इस्लामी शरीयत को लेकर भ्रम फैलाने पर भी बयान दिया। वक्ताओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस्लामी शरीयत के खिलाफ उलूल जुलूल बातें की जा रही हैं। इसलिए उलमा की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। उलमाओं को सही और प्रामाणिक ज्ञान लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी बनती है।

लोगों को शरियत के विषय में बताया जाए

जिससे कि लोगों को शरीयत की जानकारी हो सके और खिलाफ में बयानबाजी ना हो। कार्यक्रम में सैयद बिलाल अब्दुल हई असनी नदवी ने कहा कि इस्लामी शरीयत मानव के कल्याण के लिए है। इसके माध्यम से हमें दीन दुखियों के कल्याण के विषय में कार्य करने का मौका मिलता है।