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‘भाजपा बनने चली थी सयानी, निपट गई उसकी कहानी’, जनता पूछ रही- असंवैधानिक काम करने की सजा क्या? अखिलेश का BJP पर तंज

इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने बीजेपी पर तंज कसा है।
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लखनऊ

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Vinay Shakya

•

Updated: 26 Jun 2026, 5:50 PM IST

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अखिलेश यादव का योगी आदित्यनाथ सरकार पर तंज (फोटो-पत्रिका)

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार द्वारा प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के फैसले पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव (Samajwadi Party Chief Akhilesh Yadav) ने BJP पर तंज कसा है। अखिलेश ने 'X' पोस्ट पर लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा है।

अखिलेश ने क्या कहा?

इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा यूपी में प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर रोक लगाने के बाद अखिलेश यादव ने बीजेपी को घेरा है। अखिलेख ने 'X' पर लिखा- उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार द्वारा एक तरफ झूठी तारीफ के प्रायोजित कार्यक्रम लगातार करवाए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार ने ये कहकर रंग मे भंग कर दिया कि कार्यकाल खत्म होने के बावजूद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का यूपी सरकार का फैसला असंवैधानिक है।

अखिलेश ने आगे लिखा- जनता पूछ रही है कि असंवैधानिक काम करने की सजा क्या होती है? अब यही ग्राम प्रधान भाजपाइयों को इसलिए गांवों में घुसने नहीं देंगे, क्योंकि भाजपा सरकार द्वारा उन्हें प्रशासक बनाने के आदेश ने उनमें कुछ नए काम करने की उम्मीद जगाई थी। जिसका वादा वो जनता से कर चुके थे। अब जनता तो तकनीकी पक्ष समझती नहीं है कि क्या हुआ? वो तो यही मानेगी कि प्रधान जी ने अपना वादा पूरा नहीं किया और सारा फंड-बजट-पैसा डबल इंजन के साथ मिल-बांटकर खा गए।

अखिलेश बोले- BJP ने प्रधानों को फंसा दिया

अखिलेश ने आगे लिखा- प्रधानों में इस बात का भी डर है कि कहीं इन बीच के दिनों के खर्चे का खामियाजा उनको अपनी जेब से न भरना पड़े। हो सकता है कल को 'पैसा वापसी' का आदेश भी आ जाए। जब कार्यकाल गलत साबित हो गया है तो उस समय में खर्च हुआ पैसा भी तो कानूनी रूप से गलत माना जाएगा।

भाजपा ने प्रधानों को बहुत बुरा फंसा दिया है। वहीं, प्रधानों ने जिन ठेकेदारों को काम दिया था, वो भी इन बीच के दिनों के बिलों का भुगतान कराने के लिए प्रधानों का दरवाजा खटखटाएंगे। इसीलिए प्रधान अब भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की गांव-गांव में नाकाबंदी कर देंगे। भाजपा बनने चली थी सयानी, निपट गई उसकी ही कहानी। भाजपा किसी घाट की नहीं रही। विशेष: पंचायती राज मंत्री तो घर से ही नहीं निकल पाएंगे, गांव पहुंचना तो दूर की बात है।

26 मई को खत्म हुआ ग्राम प्रधानों का कार्यकाल

उत्तर प्रदेश की 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया था। इसके बाद यूपी सरकार ने ग्राम पंचायतों में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए प्रधानों को प्रशासक बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके तहत कार्यकाल खत्म होने के बावजूद गांवों की सत्ता और विकास कार्यों की जिम्मेदारी उन्हीं प्रधानों के हाथों में रहने का निर्णय लिया गया था। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी।