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‘सच बोलने की आजादी नहीं’, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बनते ही पूजा पाल का सपा पर बड़ा आरोप

समाजवादी पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हुईं विधायक पूजा पाल को प्रदेश उपाध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने सपा पर सम्मान और सच बोलने की आजादी नहीं होने का आरोप लगाया।
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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jun 26, 2026

भाजपा में बढ़ा पूजा पाल का कद, बनीं प्रदेश उपाध्यक्ष; सपा पर बोलीं- 'वहां सच बोलने और सम्मान की कोई जगह नहीं' (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

भाजपा में बढ़ा पूजा पाल का कद, बनीं प्रदेश उपाध्यक्ष; सपा पर बोलीं- 'वहां सच बोलने और सम्मान की कोई जगह नहीं' (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

Pooja Pal Becomes BJP UP Vice President, Targets SP Over Respect and Freedom Issues: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं विधायक पूजा पाल को प्रदेश उपाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। इस नियुक्ति के बाद प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

नई जिम्मेदारी, नया संकल्प

प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने के बाद पूजा पाल ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पद उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं है, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने उन पर जो विश्वास जताया है, वह उसे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाएंगी।

पूजा पाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और जनहित के लिए कार्य करने वाला एक मजबूत संगठन है। पार्टी की विचारधारा, उसके सिद्धांत और संगठन के प्रति उनका पूर्ण समर्पण रहेगा। उन्होंने कहा कि वे प्रदेश के कोने-कोने तक जाकर संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का काम करेंगी तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को जोड़कर भाजपा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास करेंगी।

सपा पर बोला बड़ा हमला

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पूजा पाल ने समाजवादी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा में जो चीजें बाहर से दिखाई देती हैं, वास्तविकता उससे बिल्कुल अलग है। वहां कार्यकर्ताओं और नेताओं के आत्मसम्मान की कोई कद्र नहीं है।

उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें भी लगता था कि पार्टी में उनका सम्मान किया जा रहा है, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें यह एहसास हुआ कि जब अपने हक और सम्मान की बात आती है तो पार्टी आपके साथ खड़ी नहीं होती। ऐसे समय में व्यक्ति को यह समझ आता है कि उसका सम्मान केवल दिखावा था।

पूजा पाल ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में अनेक संघर्ष किए हैं और लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। जब उनके जीवन में ऐसा समय आया कि उन्हें न्याय मिला और अपनी बात रखने का अवसर मिला, तब उनसे कहा गया कि वे अपनी बात सार्वजनिक रूप से नहीं रख सकतीं। उन्हें केवल पार्टी की राजनीति करने के लिए कहा गया, सच बोलने की अनुमति नहीं थी। उनका कहना था कि जिस पार्टी में सच बोलने की आजादी न हो और जहां किसी व्यक्ति के सम्मान और भावनाओं की कोई कीमत न हो, वहां रहना मुश्किल हो जाता है।

'सम्मान खत्म हो जाए तो सब खत्म हो जाता है'

पूजा पाल ने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में आत्मसम्मान सबसे बड़ी पूंजी होता है। यदि कोई पार्टी आपके अच्छे समय में, आपकी उपलब्धियों के समय और आपके सम्मान की रक्षा के समय आपके साथ नहीं खड़ी होती, तो वहीं पर रिश्ते समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह बात बहुत गहराई से महसूस हुई और उसी के बाद उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा निर्णय लिया। उनके अनुसार, किसी भी कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि के लिए आत्मसम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।

अखिलेश यादव पर साधा निशाना

पूजा पाल ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उनसे ज्यादा चिंता अखिलेश यादव को उनकी रहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उनकी किसी से कोई बातचीत ही नहीं हुई थी, तब उनके बारे में तरह-तरह की बातें फैलाना और उसे हास्य या व्यंग्य का रूप देना कितना उचित है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव जैसे बड़े राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की भाषा और तंज शोभा नहीं देता। राजनीति में मर्यादा और गरिमा का पालन होना चाहिए।

महिला सम्मान का मुद्दा उठाया

पूजा पाल ने समाजवादी पार्टी की सोच पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक महिला विधायक पर व्यंग्य किए जा रहे हैं, उससे स्पष्ट होता है कि विपक्ष महिलाओं को लेकर कैसी मानसिकता रखता है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई महिला अपने सम्मान और अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई निर्णय लेती है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन समाजवादी पार्टी के नेताओं ने जिस प्रकार से टिप्पणियां कीं, वह महिलाओं के प्रति उनकी सोच को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं को सम्मान देने वाली पार्टी है और यही कारण है कि आज देश और प्रदेश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

2027 में फिर खिलेगा कमल : पूजा पाल

प्रदेश उपाध्यक्ष बनने के बाद पूजा पाल ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने आप में एक मजबूत संगठन है और पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण जनता का भरोसा भाजपा पर लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत हुई है, विकास कार्यों को गति मिली है और गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए अनेक योजनाएं चलाई गई हैं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश की जनता भाजपा के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनेगा और भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।

भाजपा संगठन को मिलेगा नया संदेश

वरिष्ठ राजनीतिक जानकार मनोज उपाध्याय का मानना है कि पूजा पाल को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए जाने से भाजपा ने कई राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है। एक ओर पार्टी ने महिला नेतृत्व को मजबूत करने का संकेत दिया है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों से आने वाले नेताओं को यह संदेश भी दिया है कि भाजपा में उन्हें सम्मान और जिम्मेदारी दोनों मिल सकती हैं।

पूजा पाल की पहचान एक संघर्षशील नेता के रूप में रही है। उनके राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने राजनीतिक अस्तित्व को बनाए रखा। ऐसे में उन्हें प्रदेश संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देना भाजपा की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

सपा और भाजपा के बीच बढ़ेगी जुबानी जंग

पूजा पाल के बयान के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होगी। सपा की ओर से भी उनके आरोपों का जवाब दिया जा सकता है। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच राजनीतिक संघर्ष और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। महिला सम्मान, राजनीतिक मर्यादा और संगठनात्मक ताकत जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रह सकते हैं।

दिलचस्प होगा 2027 का सियासी मुकाबला

उत्तर प्रदेश की राजनीति देश की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में पूजा पाल जैसी नेताओं की राजनीतिक सक्रियता और उनके बयान आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल भाजपा में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद पूजा पाल उत्साहित दिखाई दे रही हैं और उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया है। वहीं, समाजवादी पार्टी पर लगाए गए उनके आरोपों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह राजनीतिक विवाद किस दिशा में जाता है और 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता किसे अपना समर्थन देती है। लेकिन इतना तय है कि पूजा पाल की नई भूमिका और उनके तीखे राजनीतिक बयान आने वाले समय में प्रदेश की सियासत को और अधिक गर्माने वाले हैं।