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सारस समेत इन वन्य जीव को पालना है क्राइम, जुर्माने के साथ हो सकती है जेल

Arif Saras Friendship: भारत में शौक के लिए कोई भी वन्य जीव पाला नहीं जा सकता है। भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अनुसार, सिर्फ दूध देने और कृषि प्रयोग वाले पशुओं को ही पाला जा सकता है।

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लखनऊ

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Aman Pandey

Mar 29, 2023

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अमेठी के आरिफ और सारस की दोस्ती इन दिनों चर्चा में है। दरअसल, 2022 में आरिफ की मुलाकात सारस से हुई थी। उस समय सारस जख्मी था। आरिफ ने उसकी जान बचाई। कुछ ही दिनों में दोनों के दोस्ती के किस्से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। दोस्ती की मिसाल इससे समझ लीजिए कि खुद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आरिफ से मिलने पहुंचे। इस बात की भनक जैसे ही वन विभाग को लगी, उन्होंने सारस को आरिफ से अलग कर दिया। उसे समसपुर पक्षी विहार छोड़ दिया।

समसपुर पक्षी विहार से अपने दोस्त आरिफ की तलाश में सारस उड़कर नजदीकी गांव जा पहुंचा। उसे दोबारा वन विभाग ने पकड़ लिया। इसके बाद उसे खुले में न रखकर कानपुर चिड़ियाघर में रखा गया। हालात यह है कि सारस ने खाना-पीना छोड़ दिया है। ऐसे में अब सारस को आरिफ के पास लाने की मुहिम छिड़ गई है।

यह भी पढ़ें: Video: ...तो ऐसी हो गई है सारस की हालत, आरिफ बोले- इसमें मेरा क्या कसूर

वहीं, मामले में आरिफ के खिलाफ FIR भी दर्ज हुई है। सारस उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है, जिसे पालना नियम विरुद्ध है। यही नहीं निजी शौक के लिए कोई भी वन्य जीव पाला नहीं जा सकता है। चाहे उसे कितनी ही सुख सुविधा के बीच क्यों न रखा जाए?

सिर्फ इन जानवरों को ही पाला सकते हैं
भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम कहता है कि सिर्फ दूध देने और कृषि प्रयोग वाले पशुओं को ही पाला जा सकता है। इसके अलावा किसी अन्य जीव को पाला नहीं जा सकता। अगर कोई पाल रहा है और उसकी शिकायत होती है तो वन विभाग कार्रवाई कर सकता है।

क्या सारस को पालने में हमारे देश में पाबंदी है?
बिल्कुल देश में कुछ जानवरों को पालने पर पाबंदी है। जिसके अंतर्गत सारस भी आता है। यही वजह है कि आरिफ पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन करने के आरोप में धारा 2, 9, 29, 51 और धारा 52 के तहत केस दर्ज किया गया है।

क्या है वन्य जीव संरक्षण कानून ?
भारत सरकार ने 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित किया था। इसका मकसद वन्य जीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना था। इस में साल 2003 में संशोधन किया गया। इसमें दंड और जुर्माना को सख्त कर दिया गया है।

जानवरों की रक्षा के लिए कानून

इन पशु-पक्षियों को पालने पर है पाबंदी
तोता, मोर, बत्तख, तीतर, उल्लू, बाज, ऊंट, बंदर, हाथी, हिरन, सफेद चूहा, सांप, मगरमच्छ, एलिगेटर, कछुआ।

पशु-पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियों को संरक्षण


पशु-पक्षी को पालने के लिए ये है नियम
अगर आप किसी भी प्रकार का कोई जानवर पालने का शौक रखते हैं तो अब इसकी जानकारी नगर निगम को देना जरूरी होगा। सालाना फीस भरकर उसका रजिस्ट्रेशन भी जरूरी है। रजिस्ट्रेशन के बिना आप अपने घर में कोई भी जानवर नहीं रख सकेंगे। वन विभाग के फैसले के मुताबिक, शहर के सभी पशुपालकों को मवेशी या जानवर पालने के लिए लाइसेंस हर साल नवीनीकरण करवाना होगा। इसी तरह कानून के मुताबिक उड़ना पक्षियों का मौलिक अधिकार है और उन्हें पिंजरे में बंद नहीं रखा जा सकता। उन्हें आकाश में आजाद छोड़ना होगा।