
Jilani
पत्रिका न्यूज नेटवर्क.
लखनऊ. मस्जिद निर्माण (Masjid) की कवायद शुरू हो गई। शनिवार को इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IIFC) ने मस्जिद का खूबसूरत नक्शा भी जारी किया। इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआइएमपीएलबी) ने धन्नीपुर (Dhannipur) में बनने वाली इस मस्जिद पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एआइएमपीएलबी (AIMPLB) के कार्यकारी सदस्य और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी (Zafaryab Jilani) का कहना है कि यह जमीन नाजायज और गैरकानूनी है। बोर्ड इसे भारत के सांविधानिक कानून में आने वाले शरीयत के खिलाफ मानता है। जिलानी का कहना है कि हमने एक स्टैंड लिया था कि मस्जिद के बदले जमीन लेना गैरकानूनी है। जब जमीन ही अवैध होगी तो उसके ऊपर बनी मस्जिद भी अवैध होगी और हम अवैध मस्जिद नहीं चाहते हैं।
सरकार ने उल्लंघन करते हुए बढ़ाया बोर्ड का कार्यकाल-
जिलानी ने यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड द्वारा जमीन स्वीकार करने के मामला पर कहा कि बोर्ड के दो सदस्यों ने इसे अस्वीकार किया था, जबकि चार ने स्वीकार किया था। इसमें इसके अध्यक्ष जुफर फारूकी भी शामिल थे। इस कारण यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद की मूल जमीन से दूर सरकार की जमीन की पेशकश को स्वीकार कर लिया।
सरकार ने वक्फ कानून का उल्लंघन करते हुए बढ़ाया बोर्ड का कार्यकाल-
यह भी कहा कि बोर्ड के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 31 मार्च, 2020 को समाप्त हो गया था और वक्फ कानून के मुताबिक नए बोर्ड का गठन किया जाना था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं बल्कि सरकार ने वक्फ कानूनों का उल्लंघन करते हुए बोर्ड के कार्यकाल को छह महीने के लिए दो दफा बढ़ा दिया। ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि मस्जिद के नाम पर कुछ इमारतें बाबरी मस्जिद के बदले में दी गई जमीन पर बनाई जाए, क्योंकि यूपी में सत्ताधारी राजनीतिक दल को इस बात का यकीन नहीं था कि नया बोर्ड इस मुद्दे पर सरकार की नीति पर किसी तरह की सहमति देंगे।
Published on:
23 Dec 2020 04:01 pm
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