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राम जाने कब बनेगा राम मंदिर, लेकिन चुनाव में नहीं बनेगा मुद्दा

यूपी में 6 दिसंबर को ही नहीं विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले भी ये मुद्दा जरूर उठता है कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा या नहीं। लेकिन सैकड़ों वर्ष बीत जाने के बाद भी राम मंदिर निर्माण का वो मुद्दा जहां से शुरू हुआ था आज भी वहीं खड़ा है।

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Raghvendra Pratap

Dec 05, 2016

ram mandir masjid

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राघवेन्द्र प्रताप सिंह
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 135 किलोमीटर दूर सरयू नदी के तट किनारे बसा अयोध्या- महज एक शहर नहीं है। सदियों से ये हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। क्योंकि अयोध्या को भगवान राम की जन्मस्थली माना जाता है। यूं तो अयोध्या में कई घटनाएं हुईं जिनका उल्लेख वेद पुराणों में भी दर्ज है, लेकिन 6 दिसंबर 1992 को यहां जो कुछ हुआ उसने दो समुदायों के बीत एक बड़ी लकीर खींच दी। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का ढ़ांचा गिरा दिया गया था। जिसके बाद से हर साल छह दिसंबर की तारीख आते ही अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा सुलगने लगता है। मुस्लिम समुदाय के लोग इस दिन को काला दिवस तो हिन्दू शौर्य दिवस के रूप में मनाते हैं। सरकार और सत्ता किसी की भी हो लेकिन हर साल एक बार इसका मुद्दा जरूर छिड़ता है। वैसे यूपी में 6 दिसंबर को ही नहीं विधानसभा और लोकसभा चुनाव से पहले भी ये मुद्दा जरूर उठता है कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा या नहीं। लेकिन सैकड़ों वर्ष बीत जाने के बाद भी राम मंदिर निर्माण का वो मुद्दा जहां से शुरू हुआ था आज भी वहीं खड़ा है।

मंदिर नहीं विकास होगा चुनाव का मुद्दा
उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा नेता राम मंदिर के निर्माण को लेकर बयान देने से नहीं चुकते है। जबकि उनके बयान को लेकर कांग्रेस, सपा और बसपा, भाजपा पर हमला कर उनका विरोध करते हैं। भाजपा के मंदिर मुद्दे पर आए बयान को मुद्दा बनाकर मुस्लिम वोटर्स को रिझाने की पूरी कोशिश शुरू हो जाती है। जिसका फायदा भी उन्हें मिलता है। लेकिन इस बार का समीकरण थोड़ा अलग होने वाला है। क्योंकि भाजपा ने विकास का मुद्दा लेकर उत्तर प्रदेश में उतरने का प्लान बनाया है। अपनी इसी रणनीति के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी हर सभा में राम और मंदिर की जगह विकास की बात करते हैं। मोदी सरकार अयोध्या में मंदिर की जगह म्यूजियम बनाने की बात करती है, लेकिन मंदिर पर कोई बात नहीं करती। में पीएम नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर को एम्स और खाद कारखाने की सौगात दी है। वहीं कांग्रेस समेत सभी पार्टी अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों का बखान करने से नहीं थकते और एक दूसरे पर हमला तो मानो उनका मूल मंत्र है।

क्या है अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद ?
वेद और पुराणों की मानें तो राम मंदिर की जगह पर 1528 में अयोध्या में मस्जिद का निर्माण हुआ था। जिसके बाद इस विवाद शुरू हुआ और इस विवाद को लेकर साल 1850 में पहली बार मंदिर को लेकर सांप्रदायिक दंगा फैला। उसके बाद ब्रिटिश सरकार ने बढ़ते विवाद के बाद 1859 में विवादित स्थल पर बाड़ लगा दिया। इस दौरान मुस्लिम अंदर और हिन्दू बाहरी हिस्से में पूजा-पाठ किया करते थे। मंदिर निर्माण की मांग को लेकर 1946 में हिंदू महासभा ने इस पर आंदोलन शुरू किया। 22 दिसंबर 1949 में वहां राम की मूर्ति स्थापित की गई। इस विवाद में भारतीय जनता पार्टी की इंट्री 1980 में हुई और फिर भाजप ने राम मंदिर आंदोलन का मोर्चा संभाल लिया। 1990 में एलके आडवाणी ने राम मंदिर के लिए रथयात्रा शुरू की है और 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने विवादास्पद ढांचे को गिरा दिया गया था।

कोर्ट में है राम मंदिर विवाद
राम मंदिर का विवाद जब कोर्ट पहुंचा तब इस मामले पर 13 मार्च, 2002 को सुप्रीम कोर्ट ने यथा स्थिति बनाए रखने को कहा। कोर्ट ने शिलापूजन की इजाजत देने से इनकार कर दिया। वहीं इस विवाद पर साल 2009 को लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट संसद में पेश की गई लेकिन इस विवाद में 30 सितंबर 2010 को एक नया मोड़ आया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया। जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तिसरा निर्मोही अखाड़े में जमीन बंटी। फिलहाल 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। तब से इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।